ओबीसी से पढ़ाई और एसटी से नौकरी- दोहरा खेल उजागर
आदिवासी समुदाय के हक पर चोट
चिकित्सा विभाग GRMC ग्वालियर
डॉ. सीमा बाथम
डॉ. रजनीश माझी
डॉ. विनोद बाथम अन्य चिकित्सा/फार्मेसी विभाग
डॉ. महेंद्र बाथम फार्मासिस्ट शिवपुरी
शिक्षा विभाग
शिक्षक जवाहर सिंह केवट
शिक्षक सीताराम केवट
शिक्षक सरला माझी
शिक्षक कुसुम मांझी
शिक्षक राजेश केवट
शिक्षक बाबूलाल रावत
शिक्षक सुनीता रावत
शिक्षक दशरथ रावत गुना
पुलिस विभाग
आरक्षक हेमंत बाथम साइबर सेल ग्वालियर
गीतिका बाथम एसआई पुलिस मुख्यालय भोपाल
लोकेंद्र बाथम 25वीं बटालियन भोपाल
आरक्षक महेश बाथम शिवपुरी
आरक्षक नाहर सिंह शिवपुरी
सूबेदार अनिल बाथम यातायात पुलिस श्योपुर
अन्य विभाग
अनुपम मांझी स्टेनो गुना
देवीलाल ढीमर स्टेनो राजगढ़
मनीष गौतम महाप्रबंधक बिजली कंपनी बैतूल
हाकिम बाथम जेई बिजली कंपनी होशंगाबाद
यश कुमार सिंह संयुक्त संचालक उद्यान विभाग दमोह सूची में शामिल अधिकांश अधिकारी कई वर्षों से अपने-अपने विभागों में सेवा दे रहे हैं। विभागों में कार्रवाई अब तक शून्य एफआईआर दर्ज होने के बावजूद अभी तक किसी भी विभाग ने इन पर कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की है।ना निलंबन हुआ न सेवा समाप्ति और न ही प्रमाण-पत्र की जांच की दिशा में तेज कदम उठाए गए। एसटीएफ का कहना है कि यह सिर्फ व्यक्तिगत फर्जीवाड़ा नहीं बल्कि पूरे नेटवर्क का घोटाला है- फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने वाले सत्यापन कराने वाले प्रक्रिया को क्लियर करने वाले कर्मचारी सभी इसके दायरे में आएंगे।
फर्जी प्रमाण-पत्र उद्योग की ओर इशारा
जांचकर्ताओं का मानना है कि यह मामला केवल शुरुआत है। ऐसे कई और लोग विभिन्न विभागों में हो सकते हैं जिनकी डिग्रियां जाति प्रमाण-पत्र और दस्तावेज संदेह के घेरे में हैं। हाल ही में STF ने D.Ed की फर्जी मार्कशीट से शिक्षक बने 34 लोगों को भी पकड़ा था जो बताता है कि प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। ग्वालियर और आसपास के जिलों में सामने आया यह फर्जी जाति प्रमाण-पत्र घोटाला न केवल सरकारी व्यवस्था की कमजोरी को दिखाता है बल्कि उन आदिवासी युवाओं के हितों पर भी गहरी चोट करता है जो सही पात्रता के बावजूद बेरोजगार रह जाते हैं।अब नजर इस बात पर है कि विभाग कब और कैसे इन दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करता है और व्यवस्था में पारदर्शिता बहाल करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
