आजकल देश के विभिन्न हिस्सों में भू-माफिया सक्रिय हैंजो अवैध तरीके से जमीनों पर कब्ज़ा करनेबिक्री करने या फिर उन पर धोखाधड़ी करने का काम करते हैं। यह स्थिति उन लोगों के लिए और भी जटिल हो जाती है जो अपनी संपत्ति से दूर रहते हैंया जिनके पास नियमित रूप से अपनी जमीन की देखरेख करने का समय या साधन नहीं होता। यह मुद्दा केवल व्यक्तिगत अधिकारों से जुड़ा नहीं हैबल्कि देश की भूमि व्यवस्था और कानूनी सुरक्षा के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक विशेष मामले में यह कहा कि अपीलकर्ता एक मां जो अपनी नाबालिग बेटी के नाम पर जमीन बेचना चाहती थीवह अपनी संपत्ति से दूर रहने के कारण उस जमीन की देखभाल नहीं कर सकती थी। कोर्ट ने अपीलकर्ता को जमीन बेचने की अनुमति देते हुए यह शर्त रखी कि बिक्री से प्राप्त राशि का 50 प्रतिशत नाबालिग बेटी के नाम एक राष्ट्रीयकृत बैंक में एफडी फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में जमा किया जाएगा। यह राशि तब तक नहीं निकाली जा सकेगी जब तक नाबालिग का वयस्क होने की उम्र नहीं हो जाती। कोर्ट ने यह कदम इसलिए उठाया ताकि नाबालिग की संपत्ति सुरक्षित रहे और उसका भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।
इस फैसले से एक महत्वपूर्ण संदेश मिलता है कि कोर्ट सिर्फ कानूनी अधिकारों की रक्षा नहीं करताबल्कि बच्चों और नाबालिगों की संपत्ति के प्रति भी संवेदनशील है। यह फैसला इस दिशा में एक सकारात्मक कदम हैजो यह सुनिश्चित करता है कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा की जाएसाथ ही उनके भविष्य की वित्तीय सुरक्षा भी बनी रहे।
इसके अलावाकोर्ट ने यह भी माना कि अपीलकर्ता अपनी जमीन से सैकड़ों मील दूर रहती है और उसके लिए जमीन की देखभाल करना नियमित रूप से संभव नहीं है। यह स्थिति उन लोगों के लिए सामान्य है जो रोजगार या अन्य कारणों से अपने मूल स्थान से दूर रहते हैंलेकिन ऐसे मामलों में उनके लिए अपनी संपत्ति की सुरक्षा और देखरेख करना एक बड़ी चुनौती बन जाती है। ऐसे में कोर्ट ने जमीन बेचने की अनुमति दीलेकिन साथ ही नाबालिग की वित्तीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त कदम उठाए।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का यह निर्णय भू-माफिया की बढ़ती सक्रियता और जमीनों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण है। यह बताता है कि कैसे कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से न केवल व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा की जा सकती हैबल्कि बच्चों और नाबालिगों की संपत्ति की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकती है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या ऐसे फैसले पूरे देश में भू-माफिया के खिलाफ एक प्रभावी कदम साबित हो सकते हैं? क्या इस तरह के फैसलों से भू-माफिया की गतिविधियों पर रोक लगाना संभव होगाया फिर इसे और जटिल बनाने के बजाय इसे और अधिक बढ़ावा मिलेगा? फिलहालकोर्ट के फैसले से यह साफ है कि भू-माफिया के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई और जागरूकता आवश्यक है ताकि नागरिकों की संपत्ति को सुरक्षित रखा जा सके।
इस मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जमीनों की बढ़ती कीमतें और अवैध कब्ज़े की बढ़ती घटनाओं के कारण आम आदमी के लिए अपनी संपत्ति की रक्षा करना और भी मुश्किल हो गया है। सरकार और न्यायपालिका को इस दिशा में और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि नागरिकों को उनके अधिकारों की रक्षा मिल सके और भू-माफिया पर नियंत्रण पाया जा सके।
