1. दिल्ली विधानसभा चुनाव (फरवरी 2025)
2025 में दिल्ली की राजनीति में एक बड़े बदलाव ने सबको चौंका दिया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आम आदमी पार्टी (AAP) को हराकर दो-तिहाई बहुमत हासिल किया। इस जीत ने दिल्ली में 10 साल तक सत्ता में रही केजरीवाल सरकार को सत्ता से बाहर किया और बीजेपी ने नए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को चुना। बीजेपी की यह जीत न केवल दिल्ली की सियासत में बदलाव लेकर आई, बल्कि विपक्षी एकता को भी बड़ा झटका दिया।
2. वक्फ संशोधन विधेयक (अप्रैल 2025)
अप्रैल में वक्फ संशोधन विधेयक 2025 को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार लाने के लिए पेश किया गया था, लेकिन विपक्ष और मुस्लिम संगठनों ने इसे मुस्लिम धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला करार दिया। सरकार का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता और जवाबदेही लाना था, लेकिन इसे लेकर विवाद बढ़ गया। इस विधेयक को पारित कराकर सरकार ने अपना रुख स्पष्ट किया, लेकिन यह मुद्दा आगामी चुनावों में गर्माता रहेगा।
3. पहलगाम हमला और ऑपरेशन सिंदूर (अप्रैल-मई 2025)
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तानी समर्थित आतंकवादियों द्वारा 27 पर्यटकों की हत्या ने देश को झकझोर दिया। भारत ने इस हमले का जवाब देते हुए ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया, जिसमें भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान के अंदर आतंकी ठिकानों को तबाह किया। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में भारत ने 10 मई को अचानक इस ऑपरेशन को रोक दिया, जिससे कूटनीतिक संकट पैदा हुआ। इस मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरा और आरोप लगाया कि यह निर्णय अमेरिकी दबाव में लिया गया था।
4. उपराष्ट्रपति चुनाव (सितंबर 2025)
14वें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए कार्यकाल के बीच इस्तीफा दे दिया, जिससे राजनीति में हलचल मच गई। सरकार ने सीपी राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार घोषित किया, और उन्होंने 452 वोट प्राप्त कर बी सुदर्शन रेड्डी को हराया। यह चुनाव न केवल उपराष्ट्रपति पद का अहम फैसला था, बल्कि सरकार की ताकत और विपक्ष की कमजोरी को भी दर्शाता है।
5. बिहार विधानसभा चुनाव (अक्टूबर-नवंबर 2025)
बिहार विधानसभा चुनाव ने भारतीय राजनीति में एक नई दिशा तय की। एनडीए (नीतीश कुमार) और महागठबंधन (तेजस्वी यादव) के बीच यह मुकाबला था। एनडीए ने 202 सीटों के साथ भारी जीत हासिल की, जिसमें बीजेपी ने 89 सीटें और जेडीयू ने 85 सीटें जीतीं। वहीं, महागठबंधन को केवल 30 सीटें ही मिलीं, जिससे विपक्षी गठबंधन में गहरी दरारें पैदा हुईं। इस परिणाम ने न केवल बिहार में सत्ता को बनाए रखा, बल्कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के रूप में फिर से स्थापित किया और 2029 के लोकसभा चुनावों की दिशा तय कर दी।
साल 2025 ने भारतीय राजनीति को कई अहम मोड़ों से गुजरते हुए नया आकार दिया। इन घटनाओं ने न केवल सत्तारूढ़ दलों को नई दिशा दी, बल्कि विपक्ष की रणनीति और एकजुटता को भी परख लिया। आगामी चुनावों में इन घटनाओं के प्रभाव को महसूस किया जाएगा, जो भारतीय राजनीति के अगले अध्याय का निर्धारण करेंगे।
