
प्रयाग संगीत समिति व प्राचीन कला केंद्र की मान्यता के समर्थन में सैकड़ों विद्यार्थी डीपीआई से मिले
भोपाल 19 दिसम्बर 25 (हिन्द संतरी ) गत दिनों नर्मदापुरम सहित मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से आए लगभग 100 से अधिक संगीत विद्यार्थी विगत दिवस लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई), भोपाल पहुँचे और शिक्षा अधिकारियों से स्पष्टीकरण एवं न्यायोचित निर्णय की मांग की। यह मामला देश की प्राचीन एवं विश्व-प्रसिद्ध संगीत संस्थाओं प्रयाग संगीत समिति, प्रयागराज तथा प्राचीन कला केंद्र, चंडीगढ़ द्वारा प्रदत्त प्रभाकर एवं विशारद जैसी मान्य संगीत उपाधियों की समकक्षता से संबंधित है। एक ओर मध्यप्रदेश सरकार यह दोहरी नीति अपना रही है वही कुछ दिन पूर्व ही 4 दिसंबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रयाग संगीत समिति के पक्ष में निर्णय देते हुए केंद्रीय विद्यालय संगठन के विरुद्ध भैरवी कुमारी को विजयी घोषित किया है, साथ ही पूर्व में 11/07/2006 मै सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी एक निर्णय दिया था, जिससे इन उपाधियों की वैधता पुनः सिद्ध होती है,जिसे प्रदेश के अधिकारी नकार कर न्यायालयीन आदेशों की अवमानना करते दिखाई दे रहे हैं ।
विद्यार्थियों का कहना है कि प्रयाग संगीत समिति (स्थापना वर्ष 1926) एवं प्राचीन कला केंद्र, चंडीगढ़ (स्थापना वर्ष 1956) स्वतंत्रता-पूर्व एवं यूजीसी के गठन से पूर्व से ही संगीत शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत प्रतिष्ठित संस्थान हैं। इन संस्थानों की प्रभाकर-विशारद उपाधियाँ देश के अनेक राज्यों में हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट, सीबीएसई सहित विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं द्वारा पूर्व से मान्य रही हैं। इसके बावजूद मध्यप्रदेश में वेरिफिकेशन प्रक्रिया के दौरान इन उपाधियों पर आपत्ति दर्ज की जा रही है, जिससे विद्यार्थियों में गहरा असंतोष है। कई जिलों से विद्यार्थियों को डीपीआई भोपाल उपस्थित होने के निर्देश दिए गए।
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने 62 पृष्ठों में संकलित हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट, सीबीएसई एवं अन्य सक्षम प्राधिकरणों से संबंधित प्रमाणिक दस्तावेज अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए। अधिकारियों द्वारा शीघ्र निर्णय लेने का आश्वासन दिया गया तथा उसकी पावती भी प्रदान की गई। विद्यार्थियों ने नाराजी व्यक्त कर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने संगीत शिक्षक पद हेतु निर्धारित पात्रता एवं चयन परीक्षाएँ सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की हैं तथा विगत चार वर्षों से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अंतिम चरण में उपाधियों की मान्यता पर प्रश्न उठाया जाना पूर्णतः अन्यायपूर्ण है। नोटिफिकेशन जारी होने के समय इस प्रकार की कोई शर्त नहीं थी, जबकि अब नियमों की मनमानी व्याख्या कर परिवर्तन किया जा रहा है।
इस संबंध में प्राचीन कला केंद्र, चंडीगढ़ से संबद्ध वीणा पाणि संगीत एवं ललित कला विद्यालय, नर्मदापुरम के संचालक आनंद कुमार नामदेव ने बताया कि पूर्व में शिक्षा विभाग के अनेक संगीत शिक्षक एवं महाविद्यालयों के संगीत विभागों में कलाकार इन्हीं उपाधियों के आधार पर शासकीय सेवा में कार्यरत रहे हैं एवं सेवा-निवृत्त हो चुके हैं। देश की कई विश्वविद्यालयों एवं शिक्षा विभागों द्वारा इन संस्थाओं को संगीत स्नातक एवं स्नातकोत्तर के समकक्ष मान्यता प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि संभवतः विभाग को इस विषय में पूर्ण जानकारी का अभाव है अथवा भ्रम की स्थिति बनी हुई है। विद्यार्थियों ने डीपीआई मध्यप्रदेश से मांग की है कि सभी न्यायिक निर्णयों एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर शीघ्र स्पष्ट निर्णय लेकर उनके भविष्य को सुरक्षित किया जाए।
