इंदौर । लखनऊ आज किसान दिवस है यह दिन देश के उन अन्नदाताओं को समर्पित है जिनकी मेहनत से हमारी थाली सजती है। लेकिन जब भी किसानों की बात होती हैदेश के पूर्व प्रधानमंत्री और ‘किसानों के मसीहा’ चौधरी चरण सिंह का नाम सबसे ऊपर आता है। साल 2025 में भी उनके जीवन के किस्से राजनीति में शुचिता और ईमानदारी की सबसे बड़ी मिसाल माने जाते हैं।
1966 का वो दौर: मंत्री पद और सादा जीवन
किस्सा साल 1966 का है। उस वक्त चौधरी चरण सिंह उत्तर प्रदेश सरकार में वन मंत्री जैसे कद्दावर पद पर थे। सत्ता और सुविधाओं की कोई कमी नहीं थीलेकिन उनका रहन-सहन किसी साधारण किसान जैसा ही था। उनकी सादगी का आलम यह था कि उनके घर में सुबह की शुरुआत आज के नेताओं की तरह तामझाम से नहींबल्कि अनुशासन और सादगी से होती थी।
जब बेटी वन विभाग की जीप से घर आई
एक सुबह उनकी बड़ी बेटी सत्यवती अपने बच्चों के साथ आगरा से लखनऊ अपने पिता से मिलने पहुंचीं। बातचीत के दौरान जब चौधरी साहब को पता चला कि सत्यवती सरकारी कार्य के लिए आवंटित ‘वन विभाग की जीप’ से आई हैंतो वे बेहद आहत हुए। उन्होंने अपनी बेटी को स्पष्ट समझाया कि सरकारी सुविधाएं जनता की अमानत हैंपरिवार के निजी उपयोग के लिए नहीं। उन्होंने अपनी बेटी से उस यात्रा का किराया तक सरकारी कोष में जमा करवाया था।
पत्नी की फटी धोती और अटूट ईमानदारी
चौधरी चरण सिंह की ईमानदारी का सबसे भावुक कर देने वाला पहलू उनकी पत्नी गायत्री देवी से जुड़ा है। कहा जाता है कि जब वे मंत्री थेतब भी उनकी पत्नी फटी हुई धोती को टांका लगाकर पहनती थीं। एक बार किसी ने टोका कि “चौधरी साहब मंत्री हैंआप नई धोती क्यों नहीं ले लेतीं?” इस पर सादगी भरा जवाब मिला कि जो है उसी में संतोष है। चौधरी साहब का मानना था कि यदि वे अपनी मेहनत की कमाई से अधिक खर्च करेंगेतो उन्हें भ्रष्टाचार का सहारा लेना पड़ेगाजो उनके उसूलों के खिलाफ था।
आज के दौर में प्रासंगिकता
चौधरी चरण सिंह के ये किस्से आज के दौर के राजनेताओं के लिए एक आईना हैं। उन्होंने न केवल किसानों के हक की लड़ाई लड़ीबल्कि यह भी सिद्ध किया कि सत्ता में रहकर भी इंसान अपनी जड़ों और सादगी से जुड़ा रह सकता है। यही कारण है कि आज दशकों बाद भी किसान दिवस पर उनकी ईमानदारी की गाथाएं उतनी ही प्रासंगिक हैं। अवसर राष्ट्रीय किसान दिवस 2025। व्यक्तित्व पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह। आदर्श सरकारी जीप के उपयोग पर बेटी से वसूला था किराया। सादगी मंत्री पद पर रहते हुए भी पत्नी पहनती थीं फटी धोती।
