रीत पड्डा नेधुरंधर के अलावाद कश्मीर फाइल्स औरद केरल स्टोरी जैसी फिल्मों की भी आलोचना की। उनका कहना था कि इन फिल्मों में आंकड़ों और तथ्यों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया और यह पूरे समुदाय के खिलाफ नैरेटिव तैयार करने का तरीका है। रीत ने बताया कि ऐसे मामलों में फिल्में सत्ताधारी पार्टी की लाइन के अनुसार जनता की सोच पर असर डालती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इसी तरह राजनीतिक मुद्दों पर अलग राय वाली फिल्में बनाई जातीं, जैसे किपंजाब 95, तो उन्हें रिलीज नहीं होने दिया जाता।
रीत पड्डा के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ ट्रोलिंग शुरू हो गई। कई नेटिज़न्स ने उन्हें व्यक्तिगत तौर पर निशाना बनाया और लगातार आलोचना की। इस ट्रोलिंग के दबाव के चलते रीत ने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट डिलीट कर दिया और इसके साथ ही अपना लिंक्डइन अकाउंट भी हटा दिया।
इस विवाद ने दर्शकों के बीचधुरंधर को लेकर बहस को और तेज कर दिया। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन राजनीतिक संदेश और नैरेटिव को लेकर दर्शकों में मतभेद नजर आए। आदित्य धर के निर्देशन वाली इस फिल्म ने दर्शकों को दो हिस्सों में बाँट दिया और फिल्म के राजनीतिक संदर्भों को लेकर सोशल मीडिया पर गर्म बहस छिड़ गई।
इस पूरी घटना ने यह भी दिखाया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी राय साझा करना कभी-कभी व्यक्तिगत हमलों और ट्रोलिंग का कारण बन सकता है। रीत पड्डा ने अपनी राय स्पष्ट रूप से रखी, लेकिन प्रतिक्रिया इतनी तीव्र हुई कि उन्हें अपनी ऑनलाइन उपस्थिति पूरी तरह से बंद करनी पड़ी।
