नई दिल्ली। अल्लू अर्जुन की फिल्म पुष्पा 2: द रूल की रिलीज़ के एक साल बाद हैदराबाद के संध्या थिएटर में हुई दुखद भगदड़ का असर पीड़ित परिवार पर अभी भी गहरा है। इस घटना में 8 वर्षीय श्रीतेज गंभीर रूप से घायल हुए और उनकी माँ रेवती की मौत हो गई थी। अब उनके पिता, मगदम्पल्ली भास्कर का दावा है कि फिल्म स्टार और उनकी टीम ने आर्थिक मदद के वादे के बावजूद परिवार की मदद में ढील दिखाई है।
भास्कर ने बताया कि उनके बेटे का इलाज और देखभाल बेहद महंगी है। श्रीतेज को दुर्घटना के बाद 146 दिन तक कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में भर्ती रहना पड़ा और इसके बाद उन्हें न्यूरो-पुनर्वास केंद्र में शिफ्ट किया गया। वर्तमान में श्रीतेज सामान्य जीवन गतिविधियाँ नहीं कर पा रहे हैं – वे ठीक से खाना, पीना और सांस लेना नहीं सीख पाए हैं। हर महीने उनके इलाज और देखभाल पर लगभग 1.25 लाख खर्च हो रहे हैं, जिसमें अकेले चिकित्सा खर्च 90,000 हैं। इस वजह से भास्कर को अपनी सोने की दुकान छोड़नी पड़ी और पूरे परिवार की जिम्मेदारी अकेले संभालनी पड़ रही है। उन्होंने यह भी बताया कि केवल इस साल उनके बेटे के पैर की सर्जरी पर ही 3 लाख खर्च हुए।
भास्कर के अनुसार, अल्लू अर्जुन के परिवार ने पहले 2 करोड़ की आर्थिक मदद देने का वादा किया था। हालांकि, इस राशि से मिलने वाला ब्याज उनके लगातार बढ़ते खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि मदद के वादे को पूरा करने के लिए जब उन्होंने सीधे अभिनेता और उनकी टीम से संपर्क किया, तो उन्हें कोई जवाब नहीं मिला।
अल्लू अर्जुन की टीम ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि मदद को सीधे परिवार तक पहुंचाने के बजाय एक व्यवस्थित प्रक्रिया के तहत आवंटित किया गया है। निर्माता बन्नी वास ने कहा कि यह सही मंच नहीं है और मदद के वितरण में कई सम्मानित लोग (‘पेड्डा मनुषुलु’) और तेलंगाना फिल्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष दिल राजू शामिल हैं। उन्होंने बताया कि फंड का उपयोग चिकित्सा उद्देश्यों और दीर्घकालिक देखभाल के लिए किया जा रहा है। यदि परिवार को फंड पर्याप्त नहीं लगता या कोई असंतोष है, तो वे सीधे इन सम्मानित व्यक्तियों से संपर्क कर सकते हैं।
भगदड़ के बाद 4 दिसंबर 2024 को अल्लू अर्जुन को हैदराबाद पुलिस ने गिरफ्तार किया था, हालांकि उन्हें जमानत मिल गई थी। इसके बाद उनके पिता और निर्माता अल्लू अरविंद ने घोषणा की थी कि पीड़ित परिवार को कुल 2 करोड़ सहायता राशि दी जाएगी। इसमें अल्लू अर्जुन की ओर से 1 करोड़ और निर्माता मैत्री मूवी मेकर्स तथा निर्देशक सुकुमार की ओर से 50-50 लाख शामिल थे। इस राशि के वितरण और निगरानी के लिए दिल राजू को मध्यस्थ नियुक्त किया गया।
बन्नी वास के अनुसार, ‘पेड्डा मनुषुलु’ और दिल राजू की जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि फंड का उपयोग सही तरीके से किया जाए और श्रीतेज के दीर्घकालिक कल्याण व चिकित्सा पुनर्वास में मदद मिले। सीधे संपर्क न होने का उद्देश्य यह था कि सहायता मनमाने ढंग से खर्च न हो और एक सिस्टम के तहत काम किया जाए।
फिलहाल, भास्कर का कहना है कि ब्याज के जरिए मिलने वाली राशि मासिक खर्चों के लिए पर्याप्त नहीं है और उन्हें लगता है कि अल्लू अर्जुन ने अपने पुनर्वास के वादे की अनदेखी की। वहीं, अल्लू अर्जुन की टीम का स्पष्ट कहना है कि परिवार को अपनी शिकायत या जरूरत इस प्रणाली के माध्यम से ही बतानी चाहिए।
यह मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि बड़ी मदद भी तब तक प्रभावी नहीं बन पाती जब तक उसका सही वितरण और निगरानी सुनिश्चित न हो। परिवार की आर्थिक और भावनात्मक स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है और दीर्घकालिक देखभाल के लिए निरंतर सहायता की आवश्यकता है।
