इस पूरे मामले की जड़ें 3 मार्च, 2025 को केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुई एक बड़ी कार्रवाई से जुड़ी हैं। उस दिन डीआरआई DRI ने रान्या राव के पास से विदेशी मूल का लगभग 14.213 किलोग्राम सोना जब्त किया था, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 12.56 करोड़ रुपये आंकी गई थी। लेकिन यह तो महज एक शुरुआत थी। इसके बाद जब जांच का दायरा बढ़ा और संबंधित ठिकानों पर छापेमारी की गई, तो जांच एजेंसियां भी दंग रह गईं। तलाशी के दौरान 2.06 करोड़ रुपये के सोने के जेवर और 2.67 करोड़ रुपये की बेहिसाब भारतीय नकदी बरामद हुई। इस जब्ती ने स्पष्ट कर दिया कि यह मामला केवल एक बार की तस्करी का नहीं, बल्कि एक सुनियोजित संगठित अपराध का हिस्सा है।
ED की विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इस सिंडिकेट ने महज एक साल के भीतर मार्च 2024 से मार्च 2025 तक लगभग 127.287 किलोग्राम सोने की भारत में तस्करी की। इस तस्करी किए गए सोने की कुल वैल्यू 102.55 करोड़ रुपये से अधिक है। सीबीआई CBI द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज एफआईआर को आधार बनाकर ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा 3 और 4 के तहत अपनी कार्यवाही तेज की है। डीआरआई पहले ही सीमा शुल्क अधिनियम Customs Act की धारा 135 के तहत शिकायत दर्ज कर चुका है। अब चार्जशीट दाखिल होने के बाद रान्या राव और उनके साथियों की मुश्किलें बढ़ना तय है, क्योंकि एजेंसियां अब उस ‘ब्लैक मनी’ के रूट को ट्रैक कर रही हैं जो इस सोने की तस्करी से पैदा हुआ था।
