न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेज और असाइनमेंट समझौते यह संकेत देते हैं कि संबंधित साउंड रिकॉर्डिंग्स और म्यूजिकल वर्क्स पर अधिकार वादी कंपनी के पास हैं। अदालत ने माना कि वर्ष 1976 से 2001 के बीच विभिन्न फिल्म निर्माताओं और सारेगामा के बीच हुए असाइनमेंट समझौतों के तहत कई भारतीय भाषाओं की फिल्मों के संगीत और रिकॉर्डिंग्स के अधिकार कंपनी को सौंपे गए थे।
सारेगामा की ओर से दलील दी गई कि इन समझौतों के जरिए कंपनी को संबंधित सिनेमैटोग्राफ फिल्मों का हिस्सा बनने वाले संगीत और साउंड रिकॉर्डिंग्स को दोबारा बनाने लाइसेंस देने और व्यावसायिक रूप से उपयोग करने के विशेष विश्वव्यापी और निरंतर अधिकार प्राप्त हुए। कंपनी ने आरोप लगाया कि फरवरी 2026 से इलैयाराजा ने इन रिकॉर्डिंग्स को तीसरे पक्ष को लाइसेंस देना शुरू कर दिया और उन्हें अमेजॉन म्यूजिक आईट्यून्स तथा जियो सावन जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध कराया साथ ही उन पर मालिकाना हक का दावा भी किया।
कंपनी का कहना है कि यह कदम उसके वैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है और इससे बाजार में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई है। सारेगामा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने तर्क दिया कि कॉपीराइट कानून के तहत फिल्म के लिए तैयार किए गए संगीत और साउंड रिकॉर्डिंग का प्रथम स्वामी फिल्म निर्माता होता है जब तक कि अनुबंध में कुछ और प्रावधान न हो। चूंकि निर्माताओं ने अपने अधिकार विधिवत असाइनमेंट के माध्यम से कंपनी को हस्तांतरित कर दिए थे इसलिए कंपनी ही वैध अधिकारधारी है।
पीठ ने शिकायत प्रस्तुत दस्तावेजों और दलीलों की समीक्षा के बाद कहा कि वादी ने प्रथम दृष्टया एक मजबूत मामला स्थापित किया है। अदालत ने यह भी माना कि यदि कथित उल्लंघन जारी रहा तो वादी को ऐसा अपूरणीय नुकसान हो सकता है जिसकी भरपाई केवल आर्थिक मुआवजे से संभव नहीं होगी। साथ ही सुविधा का संतुलन भी वादी के पक्ष में पाया गया।
अदालत ने प्रतिवादियों को समन जारी करते हुए निर्देश दिया कि वे समन प्राप्ति के 30 दिनों के भीतर अपना लिखित बयान दाखिल करें। अंतरिम रोक से संबंधित आवेदन का जवाब चार सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।
यह आदेश संगीत उद्योग में कॉपीराइट असाइनमेंट समझौतों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संगीत के अधिकारों को लेकर चल रही बहस को और तेज कर सकता है। अब निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं जहां इस विवाद के कानूनी पहलुओं पर विस्तार से विचार होगा।
