नई दिल्ली।एक्शन फिल्मों की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाले जैकी चैन ने 71 वर्ष की उम्र में अपने प्रशंसकों को भावनात्मक कर देने वाला खुलासा किया है। उन्होंने हाल ही में एक विशेष गीत रिकॉर्ड किया हैजिसे उनकी मृत्यु के बाद रिलीज़ किया जाएगा। मंच पर यह बात साझा करते समय उनकी आवाज़ में अनुभव की गहराई और आंखों में जीवन भर की थकान साफ झलक रही थी। यह मानो उनके जीवन का आख़िरी संदेश होजिसे वह खुद दुनिया तक पहुंचाना चाहते हों।
1954 में हांगकांग में जन्मे जैकी चैन का बचपन आसान नहीं रहा। मात्र सात साल की उम्र में उन्हें चीनी ओपेरा ट्रेनिंग स्कूल भेज दिया गयाजहां रोज़ाना करीब 20 घंटे शारीरिक और मानसिक प्रशिक्षण दिया जाता था। सख्त अनुशासनकठोर सज़ाएं और भावनाओं पर नियंत्रण उनके रोज़मर्रा के जीवन का हिस्सा थे। जैकी बाद में स्वीकार कर चुके हैं कि उस दौर में रोने तक की इजाज़त नहीं होती थी।
यही कठिन ट्रेनिंग आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी। 70 और 80 के दशक में जैकी चैन ने लगभग हर खतरनाक स्टंट खुद किया। इस दौरान उन्हें 30 से अधिक गंभीर चोटें आईं। 1986 में फिल्म आर्मर ऑफ गॉड की शूटिंग के दौरान एक खतरनाक हादसे में उनके सिर में गंभीर चोट लगी जिससे उनकी जान पर बन आई थी। उस घटना के बाद जैकी को एहसास हुआ कि ज़िंदगी ने उन्हें दूसरा मौका दिया है।
इसके बावजूद सफलता तुरंत नहीं मिली। लगभग एक दशक तक हॉलीवुड ने उन्हें नजरअंदाज़ किया। एशियाई चेहरा, भाषा की बाधा और अलग एक्शन स्टाइल को वजह बताया गया। लेकिन जैकी चैन ने हार नहीं मानी। 1998 में रिलीज़ हुई फिल्म रश ऑवर ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई और वे वैश्विक स्टार बन गए।
उनकी ज़िंदगी के कई चौंकाने वाले सच
बाद में सामने आए। साल 2003 में उनके पिता ने बताया कि वे एक गुप्त एजेंसी से जुड़े थे, जबकि उनकी मां का अतीत भी विवादों से भरा रहा। जैकी ने अपनी आत्मकथा में लिखा कि उनके जीवन के सबसे बड़े रहस्य उनके अपने परिवार से जुड़े थे।पर्सनल लाइफ को लेकर भी जैकी चैन ने खुद को कभी आदर्श नहीं बताया। उन्होंने स्वीकार किया कि वे अपने बेटे के लिए अच्छे पिता नहीं बन पाए। आज जब उनका आख़िरी गीत चर्चा में है, तो जैकी चैन का संदेश साफ है-ज़िंदगी में आख़िरी होने से मत डरो, अधूरा रह जाने से डरो।
