उन्होंने बताया कि जिस शख्स पर वह भरोसा करती थीं, उसी ने उनके खिलाफ काम किया। उस वक्त उन्हें समझ आया कि इंडस्ट्री में हर कोई आपका भला नहीं सोचता। कभी-कभी लोग मामूली अंतर से भी असुरक्षित महसूस करने लगते हैं और नहीं चाहते कि आप आगे बढ़ें या उनसे ज्यादा चमकें।
ऋचा ने माना कि शुरुआत में वह थोड़ी भोली थीं, लेकिन इस घटना ने उन्हें सिखाया कि:
अपनी पसंद और फैसलों का बचाव करना जरूरी है
हर किसी पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं किया जा सकता
सही लोगों को पहचानना और अपनी सीमाएं तय करना बेहद अहम है
दिलचस्प बात ये है कि उन्होंने इस कड़वे अनुभव को कटुता में नहीं बदला। बल्कि अब वह इंडिपेंडेंट फिल्ममेकर्स को खुलकर आगे आने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। उनका साफ कहना है कि बड़े कलाकारों तक पहुंचना उतना मुश्किल नहीं जितना समझा जाता है।
उनके लिए सबसे अहम है:
अच्छी और सच्ची स्क्रिप्ट
असरदार कहानी
ईमानदार लेखन
वह चाहती हैं कि इंडी क्रिएटर्स बिना झिझक उनसे संपर्क करें, खासकर अगर कहानी में दम हो।
साथ ही, ऋचा इन दिनों एक नई नॉन-फिक्शन सीरीज प्रोड्यूस कर रही हैं, जो भारत की जानी-पहचानी जगहों को नए नजरिए से दिखाएगी। यह सीरीज ट्रैवल, कल्चर और उन कहानियों पर केंद्रित होगी जो अक्सर मुख्यधारा की नजर से छूट जाती हैं। इसका उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक विविधता, समुदायों और मानवीय जज्बे को संवेदनशील और इमर्सिव तरीके से सामने लाना है।
सच कहूं तो, ये वही ग्रोथ आर्क है जो किसी भी कलाकार को गहराई देता है—धोखा, सीख, और फिर दूसरों के लिए दरवाजे खोल देना।
