नई दिल्ली। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता गोविंदा ने एक बार अपने इंटरव्यू में कहा था कि उनके लिए फिल्म का नाम इतना महत्वपूर्ण है कि उन्होंने महज नाम पसंद न आने पर कई फिल्में ठुकरा दीं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब दो फिल्ममेकर्स एक ही नाम के लिए भिड़ जाते हैं, तो उसका फैसला कैसे होता है? दरअसल, फिल्म का नाम चुनना केवल एक क्रिएटिव फैसला नहीं है बल्कि इसके पीछे IMPPA और IFTDA जैसी संस्थाओं की एक जटिल प्रक्रिया काम करती है।
IMPPA फिल्मों का रजिस्ट्री ऑफिस
साल 1937 में गठित इंडियन मोशन पिक्चर प्रोडक्शन एसोसिएशन IMPPA प्रोड्यूसर्स के लिए काम करने वाली सबसे पुरानी और प्रमुख संस्था है। इसे आप फिल्मों का ‘रजिस्ट्री ऑफिस’ कह सकते हैं। इसका मुख्य काम फिल्मों के नामों Titles को सुरक्षित रखना और उनकी रजिस्ट्री करना है।नाम की सुरक्षा यदि कोई प्रोड्यूसर अपनी फिल्म का नाम ‘धुरंधर’ रखना चाहता है, तो उसे सबसे पहले IMPPA में यह चेक करना होगा कि यह नाम पहले से किसी और ने बुक तो नहीं किया है। टाइटल ब्लॉकिंग प्रोड्यूसर्स भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए पहले से ही कुछ आकर्षक नाम बुक करके रख सकते हैं ताकि कोई दूसरा उनका उपयोग न कर सके।
नाम फाइनल करने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया
किसी भी फिल्म प्रोड्यूसर को इन चरणों का पालन करना अनिवार्य है बैनर रजिस्ट्रेशन सबसे पहले अपने प्रोडक्शन हाउस बैनर का नाम रजिस्टर करना होता है। इसके लिए पैन कार्ड, GST और आधार जैसे दस्तावेज जरूरी हैं। मेंबरशिप फीस कैटेगरी के आधार पर प्रोड्यूसर को 5,000 से 20,000 रुपये तक की मेंबरशिप फीस देनी होती है।
टाइटल बुकिंग एक बार बैनर रजिस्टर होने के बाद, फिल्म का टाइटल ब्लॉक करने के लिए सालाना 350 से 500 रुपये की फीस चुकानी पड़ती है। इसे हर साल रिन्यू भी कराना होता है।CBFC के लिए प्रमाण IMPPA द्वारा जारी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट को फिल्म सर्टिफिकेशन CBFC के समय दिखाना होता है, जिसके बिना फिल्म रिलीज नहीं हो सकती।
IFTDA कार्ड डायरेक्टर्स का सुरक्षा कवच
फिल्म के नाम और निर्माण के साथ-साथ निर्देशन के क्षेत्र में भी कड़े नियम हैं। यहाँ इंडियन फिल्म्स एंड टीवी डायरेक्टर्स एसोसिएशन IFTDA की भूमिका अहम हो जाती है। यह संस्था डायरेक्टर्स और असिस्टेंट डायरेक्टर्स के अधिकारों की रक्षा करती है।पेमेंट की सुरक्षा यदि कोई प्रोड्यूसर काम लेने के बाद डायरेक्टर के पैसे देने से मना करता है, तो IFTDA उस फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने तक की ताकत रखता है। पहचान और भरोसा फिल्म सेट पर IFTDA कार्ड एक डायरेक्टर की आधिकारिक पहचान होती है। ज्यादातर बड़े प्रोड्यूसर्स केवल उन्हीं डायरेक्टर्स को काम देते हैं जिनके पास यह कार्ड होता है।
