एक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान विवेक वासवानी ने साफ कहा कि वह ऐसे माहौल में काम नहीं कर सकते जहां अनुशासन की कमी हो और लोग शराब पीकर काम करें। उनके मुताबिक फिल्म सेट एक पेशेवर जगह होती है जहां समय और काम दोनों की गंभीरता जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता एक व्यवस्थित और सम्मानजनक कार्य वातावरण है और अगर यह नहीं मिलता तो वह किसी भी बड़े स्टार के साथ काम करने से पीछे हट सकते हैं।
विवेक ने सलमान खान के काम करने के तरीके पर भी टिप्पणी की और कहा कि वह कुछ खास निर्देशकों और निर्माताओं के साथ पूरी तरह प्रोफेशनल और अनुशासित रहते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए संजय लीला भंसाली और सूरज बड़जात्या का नाम लिया। उनके अनुसार इन निर्देशकों के साथ सलमान अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं और पूरी तरह नियंत्रण में रहते हैं। इसी तरह उन्होंने आदित्य चोपड़ा का भी जिक्र किया और कहा कि बड़े बैनर और मजबूत निर्देशन के कारण वहां स्टारडम से ज्यादा अभिनय को महत्व दिया जाता है।
विवेक वासवानी का मानना है कि ऐसे फिल्ममेकर सलमान खान को एक स्टार नहीं बल्कि एक अभिनेता के रूप में देखते हैं और उनसे उसी स्तर की प्रतिबद्धता की उम्मीद करते हैं। यही वजह है कि सलमान उनके साथ अधिक अनुशासित रहते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें किसी के क्रिएटिव इनपुट से समस्या नहीं है लेकिन अनुशासनहीनता बिल्कुल स्वीकार नहीं है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर शूटिंग सुबह नौ बजे शुरू होनी है तो किसी का देर से आना पूरी टीम के काम को प्रभावित करता है। उनके अनुसार अगर किसी कलाकार को डायलॉग या कॉस्ट्यूम में बदलाव करना है तो उसे समय से पहले निर्देशक के साथ बैठकर चर्चा करनी चाहिए न कि सेट पर आकर अचानक बदलाव करने चाहिए।
जब उनसे पूछा गया कि क्या पत्थर के फूल के दौरान सलमान ने ऐसा कुछ किया था तो उन्होंने इशारों में कहा कि उस समय ऐसा संभव नहीं था क्योंकि सेट पर उनके पिता सलीम खान मौजूद रहते थे जिससे अनुशासन बना रहता था। इस पूरे बयान से साफ है कि विवेक वासवानी के लिए काम का माहौल और अनुशासन किसी भी बड़े नाम से ज्यादा महत्वपूर्ण है और यही कारण है कि एक सफल शुरुआत के बावजूद यह जोड़ी आगे नहीं बढ़ सकी।
