फिल्म ‘धुरंधर’ के बीच रिलीज हुई ‘इक्कीस’ को वो स्पेस नहीं मिला, जिसकी उम्मीद मेकर्स कर रहे थे। Sacnilk की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म ने गुरुवार को सिर्फ 1.35 करोड़ रुपये की कमाई की। इसके साथ ही आठ दिनों में इसका कुल कलेक्शन 25.6 करोड़ रुपये पर आकर ठहर गया है। पिछले कुछ दिनों से फिल्म की डेली कमाई 1 से 1.5 करोड़ के बीच सिमटी हुई है, ये तस्वीर इसके संघर्ष की कहानी पेश करती है।
ओपनिंग मजबूत हुई थी, फिर फिसली रफ्तार
आपको बता दें कि एक जनवरी को रिलीज हुई ‘इक्कीस’ ने पहले दिन सात करोड़ की ओपनिंग ली। नए साल की छुट्टी, देशभक्ति विषय और धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म, दरअसल इन तीनों फैक्टर्स ने शुरुआती भीड़ खींची। वीकेंड पर भी आंकड़े ठीक-ठाक रहे। शुक्रवार 3.5 करोड़, शनिवार 4.65 करोड़ और रविवार 5 करोड़, पर असली परीक्षा सोमवार से शुरू हुई, जहां फिल्म की कमाई अचानक गिरकर 1-1.5 करोड़ के दायरे में आ गई।
ट्रेड पंडित धरा पाण्डेय, माही और आशुतोष मानते हैं कि 50–60 करोड़ के बजट वाली इस फिल्म को सुरक्षित मुनाफे के लिए कम से कम 100 करोड़ के आसपास पहुंचना चाहिए, लेकिन अभी की स्थिति यानी कि मौजूदा ट्रेंड को देखते हुए मुश्किल नजर आ रहा है।
शहादत की कहानी, जो दिल छूती है
बात यदि कहानी की करें तो ‘इक्कीस’ 1971 के भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की वीर गाथा है। महज 21 साल की उम्र में टैंक बैटल में अद्भुत साहस दिखाने वाले अरुण खेत्रपाल को मरणोपरांत परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। निर्देशक श्रीराम राघवन ने इस कहानी को बड़े-बड़े डायलॉग्स की बजाय भावनाओं और सादगी के साथ पर्दे पर उतारने की कोशिश की है। यही सादगी फिल्म की ताकत भी है और कमजोरी भी। जहां एक वर्ग इसे ईमानदार और भावुक मानता है, वहीं दूसरा वर्ग इसे स्लो और कमर्शियल मसाले से दूर बताता है।
युवा चेहरों के साथ अनुभवी कंधे
फिल्म से अगस्त्य नंदा ने अपना थिएटर डेब्यू किया है। अमिताभ बच्चन के नाती होने के बावजूद अगस्त्य ने खुद को किरदार में ढालने की कोशिश की है और कई समीक्षकों ने उनके संयमित अभिनय की तारीफ की है। सिमर भाटिया, जो अक्षय कुमार की भांजी हैं, भी पहली बार बड़े पर्दे पर नजर आई हैं। लेकिन फिल्म का भावनात्मक केंद्र हैं धर्मेंद्र। दादा के किरदार में उनका शांत, ठहरा हुआ अभिनय दर्शकों को भीतर तक छूता है। नवंबर 2025 में उनके निधन के बाद जब यह फिल्म रिलीज हुई, तब हर सीन एक विदाई संदेश जैसा महसूस होता है। सोशल मीडिया पर #DharmendraLastFilm ट्रेंड करने लगा था।
रिव्यू अच्छे, भीड़ कम
क्रिटिक्स ने फिल्म को औसतन 3 से 3.5 स्टार दिए हैं। युद्ध के दृश्य, बैकग्राउंड स्कोर और इमोशनल टच की तारीफ हुई है, हां, कुछ पेसिंग को लेकर सवाल भी उठे हैं। मल्टीप्लेक्स में ऑक्यूपेंसी 20–30% के आसपास है। फैमिली और सीनियर सिटीजन ऑडियंस फिल्म को सपोर्ट कर रही है, लेकिन युवा दर्शक बड़े कमर्शियल विकल्पों की ओर ज्यादा आकर्षित दिख रहे हैं। फिलहाल बॉक्स ऑफिस पर ‘इक्कीस’ शायद कोई बड़ा कमाल न कर पाए, पर यह भी सच है कि सिनेमा के भावनात्मक पन्नों में इसकी जगह पक्की है। OTT राइट्स पहले ही बिक चुके हैं और माना जा रहा है कि डिजिटल रिलीज पर फिल्म को ज्यादा व्यापक दर्शक मिलेंगे।
