
(G.K.CHHIBBAR ADVOCATE BHOPAL)
कलकत्ता उच्च न्यायालय की युगल पीठ का महत्वपूर्ण निर्णय
कलकत्ता उच्च न्यायालय की युगल पीठ में न्यायामूर्ति कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सूजयपाल एवं न्यायामूर्ति पीएस सेन ने यूनियन ऑफ इंडिया बनांम मीता की याचिका में निर्णय दिया है कि पेशनर पिता और माता की मृत्य के पश्चात उनकी पुत्री विग्रह के बाद पतिद्वारा परित्याग करने जे आश्रित पुत्री पिता की पेंशन लाभ प्राप्त करने की हकदार है।
याचिका के तथ्यों के अनुसार उत्तरदाता पुत्री द्वारा केंद्रीय प्रशासकीय न्यायाधिकरण में याचिका प्रस्तुत कर पिता जी (पेशनर) रेल विभाग में कार्यरत थे 1983 में सेवा निवृत हो गए थे। माताजी की मृत्यु 5 नवंबर 2011 को हो गई थी और पिताजी की मृत्यु 2013 में हो गई थी। माता पिता की मृत्यु के बाद पेशन लाभ की राहत इस आधार पर मांगी थी कि वह पिता आश्रित थी क्योंकि उसके पति ने 1996 में ही उसका परित्याग कर दिया था।
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उसका आय का कोई साधन नहीं है इसलिए पिता की मृत्यु के बाद उसे भरण पोषण के लिए पेंशन लाभमिलना चाहिए। रेल विभाग का कहना था कि पेंशनर की पुत्री आश्रित की श्रेणी में नहीं आती है वो विवाहित थी उसके पति द्वारा छोड़ दिए जाने के आधार पर पेंशन की पात्रता नहीं है। केंद्रीय प्रशासकीय न्यायाधिकरण ने मृतक पेंशनर के आश्रित पुत्री को माना और कहा कि पिता की मृत्यु के समय वह उन पर आश्रित थी पुत्री का विवाह विच्छेद अर्थात परित्याग 1996 हो चुका था जिसके प्रकरण न्यायालय में लम्बित थे उसकी आय का कोई साधन नहीं था, इसलिए मृतक की पुत्री आश्रित की परिधि में आती है इसलिए पिता की पेशन की पात्रता है। केंद्रीय प्रशासकीय न्यायाधिकरण के निर्णय को रेल विभाग ने उच्च न्यायालय कलकत्ता में चुनौती दी। कलकत्ता उच्च न्यायालय को युगल पीठ ने केंद्रीय प्रशासकीय न्यायाधिकरण के निर्णय को यथावत रखते हुवे याचिकाकर्ता रेल विभाग की याचिका निरस्त कर दी
