भारतीय सरकारी व्यवस्था के संचालन मे विभागीय प्रशासनिक अधिकारियों और मंत्रियों / चुने हुए जनप्रतिनिधियों के बीच कई बार कुछ मुद्दों को लेकर विवाद या गतिरोध उत्पन्न हो जाता है। कारण कुछ भी हो सकता है। एक कारण जो हमेशा रहता है वो है ” अहम् का टकराव” . अफसर अपने को पढ़ा लिखा और बुद्धिजीवी प्राणी समझने के वहम मे रहता है और जनप्रतिनिधि को गँवार और बेवकूफ समझता है । जबकी मंत्री और नेता अपने आपको अफलातून समझने की ग़फ़लत मे रहते है। यही अतिवादी सोच सरकारी व्यवस्था को सुगम और सुचारु रूप से ( Smoothly & Seamlessly ) संचालित करने मे बाधा बन जाती है।
कई बार ये होता है की अगर मंत्री भ्रस्ट हो और अफसर ईमानदार हो तो भी गतिरोध बन जाता है या इसके उल्टा। और अगर दोनो ही भ्रष्ट है तो दोनो के लिए एक अनुकूल और परस्पर सहयोगी वातावरण बना रहता है। जैसे जल जीवन घोटाले मे जो फिल्म बनी वो इसका उत्तम उदाहरण है। इसे अंग्रेजी मे “Simbiotic Relationship between the Minister & Bureaucracy ” कहते है। कई बार मंत्री और अफसर के दरम्यान “” टोम & जेरि ” (Cat & mouse याने ” चूहा -बिल्ली ) वाला खेल चलता रहता है।
अभी ख़त्म हुए राजस्थान विधानसभा क्षेत्र के दौरान कांग्रेस विधायक गोविंद सिंह जी डोटासारा ने पशुपालन विभाग मे भ्रस्टाचार के मुद्दे पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव ( Call Attention Motion) के जरिये कुछ आरोप लगाए। और कहा की सचिव का “” इगो ” इतना की वे मंत्री और मुख्य मंत्री तक का आदेश नही मान रहे। फाइल पर लिख दिया ” नोट जस्टिफाइड ” . वैसे ये शब्द अंग्रेजी मे लिखे गये थे, शायद मंत्रीजी को समझ तो आ गये होगे और उनके इगो को ठेस भी लगी होगी लेकिन बेचारे मंत्री क्या कहते ? कुछ गोलमोल जवाब देकर पीछा छुड़ाया।
वैसे हम लोगो को इन बातों को ज्यादा गंभीरता से लेकर माथा खराब नही करना चाहिए क्योंकि अगले दिन किसी शादी समारोह या बर्थडे पार्टी मे ये सभी लोग हंस हंस कर गलबइयां करते नजर आ जाएंगे। भारतीय लोकतंत्र मे हम लोगों ने ऐसी अनगिनत ” नूरा कुश्तियाँ” देखी है। So, please take it Coolly . अपना बीपी और सुगर ना बढ़ाये । ये कलयुग है, सब चलता है वाला दौर है। रोज एक दूसरे को गाली दो , डकैत कहो और अगले दिन माफ़ी मांग लो और मनभेद और मतभेद वाला बासी, सस्ता चुटकला / लाइन बोलकर भोलीभाली अवाम को ठगा सा महसूस करा दो।
1993 – 94 मे नरसिम्हा राव सरकार के वक्त एक ” चीनी घोटाला” बहुत चर्चा मे रहा। उस घोटाले के महानायक थे उस वक्त के कैबिनेट मंत्री मरहूम कल्पनाथ राय जी,। फ़ूड & सिविल सप्लाई सचिव उस वक्त श्री ए सी सेन साहब जो कि अपनी ईमानदार छवि के लिए जाने जाते थे। तथा कैबिनेट सेक्रेटरी थे जनाब जफ़र सैफुल्लाह साहब. । दोनो के बारे मे कल्पनाथ जी के उच्च विचार थे ” उन्होंने फरमाया की ये दोनो सेवक और चपरासी की तरह है, जब भी उनको पानी लाने के लिए कहो आपको लाकर देंगे “। ( They are like Servants , like Chaprasis , who bring water when u tell them to ). साथ मे सेन साहब के लिए उन्होंने कहा की ” ये पागल आदमी है। ( He is a Mad man) ). राय साहब कि जो छबि थी ये पुरा इंडिया जानता था। इसी तरह भैरों सिंह जी शेखावत सरकार मे राजस्थान के एक मंत्री श्री देवी सिंह भाटी जी द्वारा एक आई ए एस अधिकारी को थप्पड़ मारने का भी किस्सा है।
आज देश और राज्यों मे जिस तरह से राजनीति और नौकरशाही के स्तर मे नैतिक गिरावट आयी है वो हम सभी के लिए गंभीर चिंता का विषय होना चाहिए। लेकिन दुर्भाग्य से जनता लाचार है कुछ कर नही पा रही है। वैसे चुने हुए मंत्रियों और उच्च प्रशासनिक अधिकारियों के बीच हमेशा एक ” एडवर्सरियल रिस्ता ” ( Adversarial Relationship ) होना चाहिए जो की सिस्टम मे संतुलन और स्वच्छता बनाये रखने के लिए ठीक रहता है लेकिन “”सिंबायोटिक रिलेशनशिप ” ठीक नही है। “Checks & Balance” व्यवस्था को सही पटरी पर रखने के लिए जरूरी है। व्यवस्था को चलाने के लिए “सामान्य बुद्धि / Common sense ” अधिक होना चाहिए, अधिक बुद्धि जीवी होने की जरूरत नही है। यही एक सफल अधिकारी और राजनेता का मै सबसे बड़ा गुण मानता हूँ । ” “मशहूर अभिनेता राजकपूर जी का ये गाना याद रखो ” सब कुछ सिखा हमने ,ना सीखी होशियारी, सच है दुनियावालों के हम है अनाड़ी ” । “. Take decisions with a Warm Heart, & Cool Head ” . Think, pause & Move , व्यवस्था सुगम चलेगी ।
