
मेनका त्रिपाठी
आपने अमूमन राष्ट्रपति भवन, विज्ञान भवन या दिल्ली के हिंदी भवन में आयोजित बड़े-बड़े सरकारी कार्यक्रमों में वह सधा हुआ, शुद्ध और प्रवाहपूर्ण हिंदी उद्बोधन अवश्य सुना होगा, जो सुनते ही मन को बाँध लेता है। भाषा की स्पष्टता, शब्दों की गरिमा और उच्चारण की सहजता—यह सब मिलकर उस मंच को विशिष्ट बना देते हैं।
क्या कभी आपने सोचा है कि इतनी शुद्ध और प्रभावशाली हिंदी के पीछे कौन-सा व्यक्तित्व कार्य करता है?
केंद्र और राज्य सरकारों में अनेक हिंदी विशेषज्ञ हैं, जो सरकारी शब्दावली का अनुवादन करते हैं, लेकिन आज हम आपको ऐसे व्यक्तित्व से परिचित करा रहे हैं, जो हरिद्वार में रहते हुए भी अपनी हिंदी से देश के अनेक राज्यों में पहचान बना चुके हैं—डॉ. नरेश मोहन।
डॉ. नरेश मोहन का जन्म जनवरी मे उत्तराखंड के चमोली जनपद में हुआ। हिंदी के प्रति उनका अनुराग बचपन से ही रहा। वर्ष 1981 से 1998 तक उन्होंने हरिद्वार स्थित बीएचईएल में हिंदी प्रवक्ता के रूप में सेवाएँ दीं। इसके बाद 1998 से 2008 तक वे हिंदी विभाग से जुड़े रहे और 2008 से 2019 तक बीएचईएल के जनसंपर्क विभाग में अधिकारी के रूप में कार्यरत रहे, जहाँ भाषा-अनुवादन उनकी प्रमुख जिम्मेदारी थी।
धीरे-धीरे उनकी भाषा-शैली, सधी हुई आवाज़ और मंच पर आत्मीय उपस्थिति उनकी पहचान बनती चली गई। हरिद्वार के छोटे-बड़े मंचों से शुरू हुआ यह सफर आज देश के शीर्ष मंचों तक पहुँचा है। आज उन्हें लोग उनके कार्य के साथ-साथ उनकी शानदार हिंदी के लिए विशेष रूप से जानते हैं।
डॉ. नरेश मोहन ने विभिन्न विषयों में 15 बार एम.ए. किया है और मनोविज्ञान में हिंदी माध्यम से पीएच.डी. प्राप्त की है। उन्होंने चार बार एच.डी. डिप्लोमा भी किया, जिसके लिए उन्हें सम्मानित किया गया। पत्रकारिता, एनसीसी, काव्य-संग्रह, कहानी-संग्रह, नाटक, लेखन और संस्मरण—उनकी साहित्यिक सक्रियता निरंतर जारी है। आकाशवाणी से लेकर अनेक राष्ट्रीय मंचों पर वे काव्य-पाठ कर चुके हैं।
उन्होंने कई महत्वपूर्ण पुस्तकों और पत्रिकाओं का संपादन किया है, जिनमें जय सुभाष (राष्ट्रीय पत्रिका), हरिद्वार महोत्सव पत्रिका तथा भारत सरकार के जल संसाधन मंत्रालय द्वारा प्रकाशित जल चेतना पत्रिका प्रमुख हैं।
हिंदी के क्षेत्र में उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि वर्ष 2010 से अब तक वे विज्ञान भवन, राष्ट्रपति भवन तथा केंद्र और राज्य सरकारों के अनेक महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में हिंदी अनुवादन और मंच संचालन की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वर्ष 2006 से वे उत्तराखंड, पंजाब, उत्तर प्रदेश, सिक्किम और आंध्र प्रदेश के राज्यपालों के कार्यक्रमों के प्रशासनिक दायित्व भी संभालते रहे हैं। गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग के अनेक कार्यक्रमों का संचालन भी वे करते हैं।
दार्जिलिंग, गोवा, मैसूर, जयपुर, दिल्ली, बनारस सहित अनेक राष्ट्रीय मंचों और अखिल भारतीय हिंदी सम्मेलनों में उनकी सशक्त उपस्थिति रही है। 14 सितंबर 2023 को पुणे (महाराष्ट्र) में गृह मंत्रालय के कार्यक्रम में, गृहमंत्री अमित शाह के मंच का दायित्व भी उन्होंने सफलतापूर्वक निभाया।
बचपन से उन्हें जानने वाले आलोक शर्मा कहते हैं—इतना व्यापक अनुभव होने के बावजूद डॉ. नरेश मोहन में लेश मात्र भी दिखावा नहीं है। वे अत्यंत मिलनसार हैं और हिंदी के प्रति उनका प्रेम आज भी उतना ही प्रखर है। उनकी बेटी वर्तमान में विदेश में अध्ययनरत है, किंतु परिवार और भाषा—दोनों से उनका गहरा जुड़ाव बना हुआ है।
मंच संचालन में उनका कोई सानी नहीं। उन्हें सुनने वाला श्रोता कार्यक्रम बीच में छोड़कर नहीं जा सकता। आज वे अपनी आवाज़ और हिंदी के माध्यम से देश के बड़े-बड़े कार्यक्रमों को नई गरिमा दे रहे हैं।
यह हरिद्वार के लिए न केवल सम्मान, बल्कि गर्व की बात है
