
2025 से चार श्रम अधिसूचित कर लागू किया गया है, जिनमें व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियाँ संहिता, 2020 प्रमुख विधान है। यह संहिता बड़े उद्योगों में कार्यरत महिला एवं पुरुष कामगारों के कार्य समय, कार्यस्थल पर सुरक्षा और कल्याण से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख करती है।
13 श्रम कानूनों का विलय : इस संहिता, 2020 में कारखाना, खदान, गोदी, भवन निर्माण, बागार, संविदा श्रमिक, अंतरराज्यीय प्रवासी मजदूर, पत्रकार एवं गैर-पत्रकार, मोटर वाहन, बीड़ी सिगार, सिनेमा कामगार आदि से संबंधित कानूनों की एक में समाहित किया गया है और कुछ नए प्रावधान जोड़े गए हैं, जो इस प्रकार हैं-
निवारक स्वास्थ्य सेवा अब सभी नियोक्ताओं को 40 वर्ष से अधिक आयु के कामगारों की वार्षिक निःशुल्क चिकित्सा जाँच कराना अनिवार्य होगा। यह कर्मचारियों के स्वास्थ्य और सेहत को बनाए रखने की दिशा में एक सराहनीय कदम है।
महिला कार्यबल की भागीदारी और रात्रि पाली में कार्य की अनुमति महिला कामगारों को सभी उद्योगों एवं संस्थानों में कार्य करने की अनुमति होगी, बशर्ते उनकी सहमति हो, उन्हें लाने-ले जाने की सुविधा उपलब्ध कराई जाए तथा पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध हों। कार्यस्थल पर सीसीटीवी की व्यवस्था होने पर महिलाएँ रात्रि पाली में भी कार्य कर सकेंगी।
ओवरटाइम पर डबल मजदूरी एक दिन में 8 घंटे से अधिक कार्य करने पर ओवरटाइम के लिए डबल मजदूरी देनी होगी।
सुरक्षा समिति का गठन अनिवार्य : जिन कारखानों में 500 से अधिक कामगार नियोजित हैं, वहाँ सुरक्षा समिति का गठन अनिवार्य होगा।
कैंटीन और शिशुगृह जहाँ 50 कामगार नियोजित हैं. वहाँ शिशुगृह तथा जहाँ 100 से अधिक कामगार हैं, वहाँ कैंटीन की व्यवस्था अनिवार्य होगी।
कारखाना पंजीयन की सीमा: अब किसी भी कारखाने के पंजीयन के लिए पावर से चलने वाले उद्योगों में 20 कामगार और बिना पावर (बिजली के बिना) चलने वाले उद्योगों में 40 कामगार नियोजित होना आवश्यक होगा। पूर्व में यह सीमा पावर से चलने वाले उद्योगों के लिए 10 और बिना पावर के लिए 20 थी। प्रवासी मजदूरों को संरक्षण जिस संस्थान में 10 से अधिक प्रवासी कामगार नियोजित हैं, वहाँ उनके भोजन तथा उनके राज्य में आने-जाने की सुविधा के प्रावधान किए गए हैं।
50 ठेका श्रमिकों पर पंजीयन अनिवार्य : अब ठेकेदारों को SD कामगार नियोजित करने पर पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। पहले यह सीमा 20 कामगार थी।
प्रावधानों के उल्लंघन पर भारी दंड : कार्य के दौरान नियोक्ता की लापरवाही से कामगार की मृत्यु होने पर 5 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया जाएगा। अन्य प्रावधानों के उल्लंघन पर 2 से 3 लाख रुपये तक का अर्थदंड हो सकता है। इतना ही नहीं, सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने पर कामगार पर भी 10 हजार रुपये तक का अर्थदंड लगाए जाने का प्रावधान है। यह कानून स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विधान है। सभी नियोक्ताओं और कामगारों को इसे भली भांति समझ लेना चाहिए
