
नर्मदापुरम 09,फरवरी,2026(हिन्द संतरी) बाल विवाह के विरुद्ध जन जागरूकता हेतु गत 27 नवंबर से 100 दिवसीय अभियान प्रारंभ किया गया है। पूरे देश में 100 दिनों का इंटेंसिव थीम वाला अभियान 8 मार्च 2026 तक चलाया जा रहा है। इसके तहत प्रथम चरण में विभिन्न शिक्षण संस्थानों जैसे स्कूल कॉलेज और यूनिवर्सिटी के जरिए जागरूकता फैलाने का कार्य किया गया। द्वितीय चरण में धार्मिक जगहो, और शादी से जुड़े सर्विस प्रोवाइडर्स पर विशेष ध्यान दिया गया। जिसमे मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा वेडिंग हॉल, बैंड पार्टी, डीजे कैटर्स और टेंट हाउस शामिल है। इस दौरान बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी लोकल पुलिस और कम्युनिटी वॉलिंटियर्स के साथ मिलकर शादी के मौसम में सघन निगरानी सुनिश्चित की गई। अभियान का तृतीय चरण 1 फरवरी से प्रारंभ किया गया है जो 8 मार्च तक चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत सामुदायिक स्तर पर जुड़ाव और ओनरशिप को मजबूत करने के लिए ग्राम पंचायत और म्युनिसिपल वार्डो पर विशेष फोकस किया जा रहा है।
देशव्यापी चलाए जा रहे हैं इस अभियान का लक्ष्य वर्ष 2029 तक सतत जन जागरूकता और श्रेणी करण द्वारा बाल विवाह को समाप्त करना तथा समुदाय तथा गांव स्तर की संस्थाओं को सशक्त बनाना, विवाह के लिए विवाह पंजीयन को अनिवार्य बनाना, बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल के माध्यम से सक्रिय रिपोर्टिंग एवं निगरानी को बढ़ावा देना, बाल विवाह मुक्त गांव और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जिलों का चिन्हांकन कर सर्टिफिकेट देना, कानून प्रवर्तन एवं बाल सुरक्षा एजेंसियों की क्षमता में वृद्धि करना ताकि वो भी बाल विवाह से संबंधित शिकायत प्राप्त होने पर शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तत्काल हस्तक्षेप सुनिश्चित कर बाल विवाह को तत्काल रोकना, बाल विवाह संपन्न ना होने देने और इसे समाप्त करने में धर्मगुरु, स्थानीय समुदायों, मंदिरों, मस्जिद और चर्च से विशेष तौर से अपील करना एवं उनसे अपील जारी करवाना। रोकथाम संरक्षण प्रोत्साहन के सिद्धांत और कानून का प्रभावित क्रियान्वयन सुनिश्चित कर बाल विवाह मुक्त भारत बनाना है।
अब तक बाल विवाह के विरुद्ध जन जागरूकता हेतु नर्मदापुरम जिले में 66 बैतूल जिले में 38 एवं हरदा जिले में 19 गतिविधियों का आयोजन किया जा चुका है। निरंतर विभिन्न गतिविधियां आयोजित कर लोगों के बीच जाकर उन्हें बाल विवाह की कुरीतियों के बारे में समझाइश जा रही है और बाल विवाह न करने हेतु जागरूक किया जा रहा है। 2 जनवरी को डोलरिया ग्राम के युवक के साथ बैतूल शहरी अंतर्गत तिलक वार्ड के खडसे परिवार की बालिका का विवाह हो रहा था, विवाह की सूचना प्राप्त होते ही विवाह प्रतिषेध अधिकारी एवं गठित दल द्वारा तत्काल मौके पर जाकर मामले की जांच की गई। जांच के दौरान बालिका की आयु निर्धारित आयु 18 वर्ष से कम पाई गई। जांच दल ने बालिका के माता-पिता एवं परिजनों को समझाइश दी एवं बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के संबंध में जानकारी दी। समझाइश देने एवं पंचनामा तैयार करने पर बालिका के माता-पिता बालिका का विवाह 18 वर्ष पूर्ण होने के बाद ही विवाह करने पर राजी हो गए।
