अब तक स्थिति यह रही है कि ये दोनों कंपनियां कई प्रोजेक्ट्स में एक दूसरे के खिलाफ बोली लगाती रही हैं। इससे न केवल रेट कम हो जाते हैं बल्कि संसाधनों का बिखराव भी होता है। सरकार का मानना है कि मर्जर के बाद यह डुप्लिकेशन खत्म होगा और दोनों कंपनियों की ताकत एक जगह केंद्रित होगी
विलय के बाद बनने वाली नई कंपनी की क्षमता काफी बड़ी होगी। मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक आरवीएनएल का मार्केट कैप करीब 53877 करोड़ रुपये है जबकि इरकॉन की वैल्यू करीब 11159 करोड़ रुपये है। दोनों के एक साथ आने पर ज्वाइंट ऑर्डर बुक डेढ़ लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकती है। इससे यह नई इकाई देश की बड़ी इंफ्रा कंपनियों को कड़ी टक्कर देने की स्थिति में आ जाएगी
इस फैसले का असर शेयर बाजार में भी तुरंत देखने को मिला। मर्जर की खबर आते ही दोनों कंपनियों के शेयरों में तेजी दर्ज की गई। निवेशकों को उम्मीद है कि बड़ी और मजबूत कंपनी बनने से वैल्यूएशन और ग्रोथ दोनों में सुधार होगा
सरकार के इस कदम को रणनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। हाल ही में Nirmala Sitharaman द्वारा पीएसयू सेक्टर में सुधार के संकेत दिए गए थे। यह मर्जर उसी दिशा में एक और बड़ा कदम माना जा रहा है जिसमें सरकारी कंपनियों को मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनाने पर जोर है
मर्जर के बाद सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि नई कंपनी बड़े और जटिल प्रोजेक्ट्स को आसानी से संभाल सकेगी। देश के भीतर रेलवे नेटवर्क के विस्तार के साथ साथ विदेशों में भी बड़े कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने में मदद मिलेगी। साथ ही मैनपावर और टेक्निकल क्षमता दोनों में इजाफा होगा जिससे प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे किए जा सकेंगे
हालांकि यह प्रक्रिया तुरंत पूरी नहीं होगी। इसके लिए कई स्तरों पर मंजूरी लेनी होगी जिसमें मंत्रालयों की स्वीकृति और कैबिनेट की अंतिम मुहर शामिल है। लेकिन अगर यह योजना सफल होती है तो भारतीय रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है
सरकार का फोकस साफ है रेलवे को न केवल देश के भीतर मजबूत बनाना बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भारतीय कंपनियों की पकड़ मजबूत करना। RVNL और IRCON का यह संभावित विलय उसी बड़े विजन की ओर एक अहम कदम माना जा रहा है
