माना जा रहा है कि एक जनवरी की समयसीमा को आगे बढ़ाया जा सकता है। गौरतलब है कि सरकार ने इस साल जून में यह प्रस्तावित किया था कि कंपनियों के लिए एक जनवरी 2026 से सभी नए दोपहिया वाहनों में एबीएस लगाना अनिवार्य होगा। इस मामले से जुड़े दो अधिकारियों ने बताया कि कंपनियों ने अब सरकार से अतिरिक्त समय मांगा है।
इनकी दलील है कि देश में नई ब्रेक प्रणाली से जुड़ी आपूर्ति अभी पर्याप्त नहीं है। अगर एक साथ सभी दोपहिया वाहनों में इसे अनिवार्य किया गया तो पुर्जों की कमी हो सकती है और उत्पादन पर असर पड़ेगा। इससे गाड़ियों की कीमतें भी बढ़ेंगी, जिसका सीधा बोझ आम ग्राहकों पर पड़ सकता है। उनका सुझाव है कि इस नियम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए, ताकि वाहन उद्योग को तैयारी का पर्याप्त समय मिल सके।
क्या है मामला
सरकार की योजना है कि सड़क हादसों को कम करने के लिए सभी दोपहिया वाहनों में एबीएस को अनिवार्य किया जाए। फिलहाल यह व्यवस्था सिर्फ 125 सीसी से अधिक क्षमता वाली बाइकों में लागू है, जबकि छोटी बाइकों और स्कूटरों में केवल कंबाइंड ब्रेकिंग सिस्टम (सीबीएस) होता है। देश के कुल बाइक बाजार में लगभग 84% हिस्सेदारी इसी सस्ते श्रेणी की है।
अधिसूचना जारी नहीं
अधिकारियों के मुताबिक, एक जनवरी की समयसीमा नजदीक होने के बावजूद स्थिति अभी साफ नहीं है। सरकार ने इस संबंध में जल्द अधिसूचना जारी करने की बात कही थी लेकिन यह अब तक नहीं हुई है। यह संकेत माना जा रहा है कि नई समय सीमा तय की जा सकती है। केंद्र सभी विकल्पों पर विचार कर रहा है। हालांकि, इस मुद्दे पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
ऐसे काम करता है एबीएस
एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (एबीएस) एक उन्नत तकनीक है, जो अचानक ब्रेक लगाने पर पहियों को लॉक होने से रोकता है, जिससे वाहन का संतुलन बना रहता है और दुर्घटनाएं टल सकती हैं। यह प्रणाली ब्रेक लगाते समय पहियों पर बार-बार दबाव देकर वाहनों को फिसलने और घसीटने को रोकती है, जिससे चालक को वाहन को नियंत्रित करने और अवरोधों से बचने का समय मिल जाता है।
क्या है सरकार का मकसद
सड़क सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में सड़क हादसों में 44% मौतें दोपहिया वाहनों से जुड़ी हैं। इसलिए इनकी सुरक्षा में सुधार जरूरी है। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य दोपहिया वाहनों से जुड़ी सड़क दुर्घटनाओं की संख्या को कम करना है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में देश में हुई कुल 1,51,997 सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 20% में दोपहिया वाहन शामिल थे।
