कमर्शियल गैस की सीमित सप्लाई के कारण अब सिलेंडर केवल अस्पतालों, सेना और पुलिस की कैंटीन, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और बस स्टैंड की कैंटीन जैसे जरूरी स्थानों को ही दिए जाएंगे। इसके लिए खाद्य विभाग को जरूरत के हिसाब से ऑयल कंपनियों को सूची भेजनी होगी। दूसरी ओर होटल, रेस्टोरेंट, मैरिज गार्डन और छोटे कारोबारियों को फिलहाल कमर्शियल गैस नहीं मिल सकेगी। इससे खानपान और अन्य व्यवसायों पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है।
राजधानी भोपाल में होटल और रेस्टोरेंट संचालकों की चिंता बढ़ गई है। भोपाल होटल एसोसिएशन के अनुसार शहर में करीब डेढ़ हजार होटल और रेस्टोरेंट हैं, जहां रोजाना दो से ढाई हजार कमर्शियल सिलेंडर की खपत होती है। जिन संस्थानों के पास कुछ स्टॉक बचा है, वे अधिकतम 48 घंटे तक ही काम चला पाएंगे। इसके बाद गैस सप्लाई नहीं मिलने पर कई होटल और रेस्टोरेंट बंद करने की नौबत आ सकती है। होटल संचालकों ने सरकार से कमर्शियल गैस की आपूर्ति बहाल करने की मांग की है।
सरकारी स्तर पर घरेलू गैस की सप्लाई सामान्य होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर समेत कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। राजधानी के कई इलाकों में लोगों को सिलेंडर बुकिंग के बाद कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। कुछ जगहों पर लोगों के बीच सिलेंडर को लेकर भाग-दौड़ की स्थिति भी बनी है।
इस बीच अधिकारियों का कहना है कि अब एक सिलेंडर की बुकिंग के बाद अगली बुकिंग करीब 25 दिन बाद ही की जा सकेगी। साथ ही सर्वर की तकनीकी समस्या और कुछ लोगों द्वारा अतिरिक्त सिलेंडर जमा करने की वजह से भी एजेंसियों के बाहर भीड़ बढ़ रही है।
गैस संकट का असर शादी समारोहों पर भी पड़ सकता है। मार्च महीने में प्रदेश में करीब 20 हजार से ज्यादा शादियां होने वाली हैं, जिनमें बड़े पैमाने पर कमर्शियल गैस सिलेंडर का इस्तेमाल होता है। पिछले तीन दिनों से सिलेंडर नहीं मिलने के कारण कैटरिंग और भोजन व्यवस्था करने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उधर अंतरराष्ट्रीय हालात का असर भोपाल के बाजारों में भी दिखाई देने लगा है। व्यापारियों के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कई खाद्य वस्तुओं और ड्राई फ्रूट्स के दाम बढ़ गए हैं। दालों की कीमतों में तेजी आई है, जबकि मिर्च और धनिया जैसे मसाले भी महंगे हुए हैं। पिस्ता, अंजीर और केसर जैसे ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है क्योंकि इनका आयात बड़े पैमाने पर ईरान के रास्ते होता है।
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर पैकेजिंग उद्योग पर भी पड़ा है। प्लास्टिक और पैकेजिंग से जुड़े सामानों के दामों में करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी बताई जा रही है। वहीं खाद्य तेल के बाजार में भी तेजी देखी जा रही है। सोयाबीन तेल की कीमतों में पिछले पंद्रह दिनों में लगभग 14 रुपए प्रति किलो तक वृद्धि हुई है, जबकि मूंगफली तेल के 15 लीटर जार की कीमत भी तेजी से बढ़ी है।
इधर गैस और जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी रोकने के लिए केंद्र सरकार ने देशभर में आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 को लागू कर दिया है। इसके तहत गैस की सप्लाई को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर वितरण की व्यवस्था की जा रही है, ताकि जरूरी सेवाओं और घरेलू उपयोग के लिए गैस की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
प्रदेश सरकार ने लोगों से घबराने की बजाय अधिकृत जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी पेट्रोल, डीजल और गैस की उपलब्धता पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं।
