साल 2026 की शुरुआत से ही सोना और चांदी लगातार मजबूती दिखा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस वर्ष अब तक सोने की कीमत में लगभग 25 हजार रुपये और चांदी में करीब 35 हजार रुपये की वृद्धि हो चुकी है। जनवरी महीने में सोने ने 1 लाख 76 हजार रुपये और चांदी ने 3 लाख 86 हजार रुपये प्रति किलो का ऑल टाइम हाई भी छुआ था।
पिछले वर्ष भी कीमती धातुओं ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया। 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 76 हजार रुपये के स्तर पर था जो वर्ष 2025 के अंत तक 1 लाख 33 हजार रुपये तक पहुंच गया। इसी तरह चांदी 86 हजार रुपये प्रति किलो से बढ़कर 2 लाख 30 हजार रुपये प्रति किलो तक पहुंची, जो करीब 167 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्शाता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की मांग मजबूत बनी हुई है। वैश्विक निवेश बैंक UBS के अनुसार 2025 में दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने 863 टन सोना खरीदा था और 2026 में यह आंकड़ा 950 टन तक पहुंच सकता है। गोल्ड ईटीएफ में निवेश भी बढ़कर 825 टन तक जाने की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट में अनुमान है कि 2026 के मध्य तक सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमत 6200 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। भारतीय मुद्रा में इसका अर्थ है कि 10 ग्राम सोने का भाव 1 लाख 80 हजार रुपये तक जा सकता है।
बढ़ती कीमतों के बीच विशेषज्ञ निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। सोना खरीदते समय हमेशा बीआईएस हॉलमार्क वाला सर्टिफाइड गोल्ड ही लेना चाहिए। हॉलमार्क से सोने की शुद्धता की पुष्टि होती है। साथ ही खरीदारी से पहले दिन की कीमत विश्वसनीय स्रोतों से जरूर जांच लें क्योंकि 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के भाव अलग होते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा तेजी निवेशकों के लिए अवसर भी है और जोखिम भी। लंबी अवधि के निवेशक गोल्ड ईटीएफ या फिजिकल गोल्ड में रणनीतिक निवेश कर सकते हैं। वहीं ज्वेलर्स के लिए भी यह दौर मांग और कारोबार दोनों के लिहाज से अहम साबित हो सकता है।
