तेजी के पीछे की वजहें
चांदी की कीमत में रिकॉर्ड तेजी के पीछे कई कारण थे। सबसे पहले, सैमसंग द्वारा लिथियम-आयन बैटरी से सॉलिड-स्टेट बैटरी में बदलाव की घोषणा ने इंडस्ट्रियल डिमांड बढ़ा दी। इसके अलावा, अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव के कारण पेरू और चाड से सप्लाई प्रभावित हुई। साथ ही, 1 जनवरी 2026 से चीन द्वारा चांदी के एक्सपोर्ट पर अप्रत्यक्ष बैन ने भी कीमतें बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। ये सभी कारक मिलकर चांदी को बाजार में महँगी बनाने का काम कर रहे थे।
एक्सपर्ट्स क्यों जताते हैं गिरावट की आशंका?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि चांदी की कीमतें अब खतरनाक स्तर पर पहुँच गई हैं। इंडस्ट्रियल डिमांड पर कीमतों की बढ़ोतरी का सीधा असर पड़ सकता है। फोटोवोल्टिक सेल और सोलर पैनल इंडस्ट्री पहले ही चांदी की जगह तांबे का इस्तेमाल बढ़ा रही है। वहीं बैटरी सेक्टर में भी चांदी से कॉपर बाइंडिंग तकनीक अपनाने की कोशिशें की जा रही हैं। ऐसे में चांदी की मांग घटने की संभावना है और FY27 के अंत तक कीमतों में 60% तक की गिरावट का अनुमान लगाया जा रहा है।
इतिहास खुद को दोहरा सकता है
चांदी के इतिहास पर नजर डालें तो अक्सर बुल मार्केट के बाद इसमें भारी गिरावट देखी गई है। कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता बताते हैं कि 1980 में हंट ब्रदर्स ने दुनिया के लगभग एक-तिहाई सिल्वर रिजर्व जमा कर लिए थे। इसके बाद एक्सचेंजों ने मार्जिन मनी बढ़ा दी, जिससे सिल्वर की कीमत $49.50 से गिरकर $11 प्रति औंस हो गई। इसी तरह 2011 में भी चांदी $48 प्रति औंस पर पहुंचने के बाद लगभग 75% गिर गई थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतिहास एक बार फिर दोहरा सकता है और निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।
निवेशकों के लिए संदेश
चांदी में हाल की तेजी निवेशकों के लिए अवसर और जोखिम दोनों लेकर आई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंडस्ट्री की मांग घटने और विकल्पों के इस्तेमाल के चलते चांदी की कीमतें तेजी से घट सकती हैं। ऐसे में निवेशकों को सिर्फ भावनाओं के आधार पर निवेश करने की बजाय सावधानीपूर्वक योजना और मार्केट ट्रेंड्स की निगरानी करनी चाहिए।
कुल मिलाकर, पिछले साल की रिकॉर्ड तेजी के बावजूद चांदी के बाजार में मंदी की संभावना बढ़ गई है। FY27 तक 60% तक गिरावट की चेतावनी निवेशकों और इंडस्ट्री दोनों के लिए महत्वपूर्ण संकेत है।
