टैक्स देने वालों की बढ़ती संख्या
2020-21 में कुल 6.72 करोड़ रिटर्न फाइल किए गए थे जिनमें से 4.84 करोड़ लोग जीरो टैक्स फाइलर्स थे यानी इन लोगों पर कोई टैक्स देनदारी नहीं थी। वहीं 1.88 करोड़ लोगों ने टैक्स अदा किया। अब 2024-25 तक जीरो टैक्स फाइलर्स की संख्या बढ़कर 5.58 करोड़ हो गई है जबकि टैक्स देने वालों की संख्या 2.82 करोड़ तक पहुंच गई है।
जीरो टैक्स फाइलर्स और टैक्स पेयर की बढ़ती संख्या
2020-21 में कुल रिटर्न का 72% जीरो टैक्स फाइलर्स ने फाइल किया था जो 2024-25 में घटकर 66% हो गया है। इसके उलट टैक्स देने वालों का हिस्सा 28% से बढ़कर 34% हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार टैक्स सिस्टम में सुधार जैसे कि AI फेसलेस असेसमेंट और सरल नियमों के चलते अब लोग टैक्स भरने में ज्यादा सहज महसूस कर रहे हैं।
कोविड के बाद बढ़ी इनकम और टैक्स कलेक्शन
COVID-19 महामारी के बाद सैलरी बिजनेस और MSMEs से होने वाली इनकम में बढ़ोतरी भी टैक्स कलेक्शन में दिखाई दे रही है। पिछले पांच वर्षों में कॉर्पोरेट मुनाफा बढ़ा है जिससे इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने और टैक्स देने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।
दक्षिणी राज्यों में जीरो टैक्स फाइलर्स की संख्या बढ़ी
विशेष रूप से दक्षिणी राज्यों में जैसे कि तेलंगाना केरल और तमिलनाडु में जीरो टैक्स फाइलर्स की संख्या में तेज़ी से वृद्धि हुई है। तेलंगाना में पिछले पांच वर्षों में जीरो टैक्स फाइलर्स की संख्या तीन गुना बढ़ गई जबकि केरल में यह ढाई गुना बढ़ी है। तमिलनाडु में यह लगभग 1.25 गुना बढ़ी है।विशेषज्ञों के अनुसार इन राज्यों में युवा अपनी पहली नौकरी शुरू करते हैं और कम सैलरी होने के बावजूद PAN कार्ड और प्रोविडेंट फंड में योगदान देना शुरू कर देते हैं। इसके अलावा टैक्स छूट का फायदा उठाने के कारण इन राज्यों में जीरो टैक्स फाइलर्स की संख्या तेजी से बढ़ी है।
हरियाणा और उत्तर भारत में टैक्स देने वालों की बढ़ोतरी
हरियाणा में टैक्स देने वालों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है। उत्तर भारत में पिछले पांच वर्षों में टैक्स देने वालों की संख्या में जबरदस्त वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब लोग अपनी इनकम को सही तरीके से दर्शाकर टैक्स अदा करने में सहज महसूस कर रहे हैं। इसके कारण टैक्स देने वालों की संख्या में 1 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है।हरियाणा इस मामले में पहले स्थान पर है जबकि गुजरात दूसरे और बिहार तीसरे स्थान पर है। मध्य प्रदेश 7वें स्थान पर है। सरकार द्वारा टैक्स छूट की सीमा बढ़ाए जाने और टैक्स सिस्टम को आसान बनाने से अब लोग अपनी इनकम सही तरीके से दिखाने और टैक्स भरने में रुचि दिखा रहे हैं। इस कारण पिछले कुछ वर्षों में टैक्स देने वालों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है जो भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था के संकेत हैं।
