रणनीतिक नेविगेशन और सुरक्षा
ग्रीन सान्वी ने ईरानी समुद्री इलाके से होकर एक तय मार्ग का पालन किया। शिपिंग विशेषज्ञों के अनुसार, यह सुनिश्चित करना जरूरी था कि जहाज संवेदनशील पानी से सुरक्षित गुजरें। इसके साथ ही दो और भारतीय एलपीजी टैंकर, ग्रीन आशा और जग विक्रम, आने वाले दिनों में होर्मुज स्ट्रेट पार करके भारत आने की उम्मीद में हैं।
भारत के झंडे वाले जहाजों की स्थिति
स्ट्रेट पार करने के साथ ही फारस की खाड़ी के पूर्वी हिस्से में भारत के झंडे वाले 17 जहाज मौजूद हैं। इनमें विभिन्न प्रकार के जहाज शामिल हैं: तीन एलपीजी टैंकर, चार कच्चे तेल के टैंकर, एक LNG टैंकर, एक केमिकल प्रोडक्ट टैंकर, तीन कंटेनर जहाज, दो बल्क कैरियर और दो जहाज जिनका नियमित मेंटेनेंस चल रहा है।
ईरान के साथ डिप्लोमैटिक समन्वय
भारत अपने व्यापारी जहाजों के सुरक्षित गुजरने के लिए ईरान के साथ डिप्लोमैटिक बातचीत कर रहा है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका और इजरायल के सहयोगी देशों के अलावा अन्य गैर-दुश्मन देशों के जहाज ईरानी अधिकारियों के समन्वय में स्ट्रेट पार कर सकते हैं। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने यह भी बताया कि चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान के जहाजों को इस चोकपॉइंट से गुजरने की अनुमति दी गई है।
ट्रांजिट के दौरान प्रोटोकॉल
ग्रीन सान्वी ने अपने भारतीय पहचान और नाविकों की जानकारी ईरानी अधिकारियों को उपलब्ध करवाई। यह प्रैक्टिस अब सुरक्षित नेविगेशन का स्टैंडर्ड बन चुकी है, ताकि तनावपूर्ण परिस्थितियों में भी व्यापारिक जहाज अपने मार्ग पर सुरक्षित रूप से आगे बढ़ सकें।
होर्मुज स्ट्रेट का महत्व
होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम मार्ग है। भू-राजनीतिक तनाव के बीच इसे सुरक्षित बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। ग्रीन सान्वी का सफलतापूर्वक पार होना दर्शाता है कि भारत एनर्जी सप्लाई लाइन को सुरक्षित बनाए रखने के लिए प्रभावी डिप्लोमेसी और समुद्री सुरक्षा उपाय कर रहा है।
