एफआईआई की लगातार बिकवाली इस सप्ताह बाजार पर दबाव डालती रही। निवेशकों ने भारतीय बाजार से 23,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की निकासी की। वैश्विक जोखिम और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के कारण विदेशी निवेशक सतर्क नजर आए। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) और लगातार आ रहे एसआईपी फंड ने बाजार में गिरावट को कुछ हद तक रोकने में मदद की।
मध्य पूर्व में तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई। ब्रेंट क्रूड 86 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जिससे ऊर्जा संबंधित सेक्टर और समग्र बाजार पर दबाव बढ़ा। बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी लगभग 3 प्रतिशत नीचे बंद हुए।
सेक्टरवार नजर डालें तो बीएसई रियल्टी इंडेक्स में 4.9 प्रतिशत, बीएसई ऑयल एंड गैस 4.8 प्रतिशत, बीएसई बैंकएक्स 4.6 प्रतिशत, बीएसई ऑटो 3.9 प्रतिशत और बीएसई कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 3.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि बीएसई कैपिटल गुड्स में 0.2 प्रतिशत की मामूली बढ़त हुई और डिफेंस सेक्टर के शेयरों में लगभग 3 प्रतिशत की तेजी देखी गई, क्योंकि वैश्विक तनाव के बीच निवेशकों ने रक्षा कंपनियों में रुचि दिखाई।
वेंचुरा सिक्योरिटीज के रिसर्च हेड विनीत बोलिंजकर के अनुसार, इस सप्ताह भारतीय बाजार में वैश्विक जोखिम और घरेलू मजबूती के बीच खींचतान देखने को मिली। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ती ऊर्जा कीमतों के कारण एफआईआई लगातार बिकवाली कर रहे हैं। हालांकि, घरेलू निवेशकों की भागीदारी और एसआईपी के जरिए लगातार फंड आना बाजार को सहारा दे रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी50 इंडेक्स 24,450 के आसपास अपने 200-दिन के मूविंग एवरेज के करीब पहुंच गया है। यह दर्शाता है कि फिलहाल बाजार अस्थिर है लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से स्थिति अभी भी मजबूत बनी हुई है। इस दौरान इंडिया वीआईएक्स इंडेक्स में 11 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई, जो निवेशकों की जोखिम से बचने की प्रवृत्ति को दर्शाती है।
इस तरह इस सप्ताह वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और एफआईआई की बिकवाली ने बाजार पर दबाव डाला, जबकि घरेलू निवेशकों और एसआईपी फंड की भागीदारी ने स्थिति को संतुलित रखा।
