बजट से पहले बाजार में असमंजस
विशेषज्ञों का मानना है कि 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट से पहले शेयर बाजार फिलहाल स्पष्ट दिशा के अभाव में है। निवेशक बड़े फैसले लेने से बच रहे हैं और सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। इसी कारण आने वाले सत्रों में भी बाजार में उतार चढ़ाव बने रहने की संभावना जताई जा रही है।तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए 25,000 का स्तर एक अहम सपोर्ट माना जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है तो बाजार में गिरावट और गहरी हो सकती है। वहीं ऊपर की ओर 25,400 से 25,500 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञ निवेशकों को फिलहाल केवल मजबूत फंडामेंटल वाले चुनिंदा लार्ज कैप शेयरों में ही निवेश की सलाह दे रहे हैं।
ग्लोबल बाजारों से मिले मिले जुले संकेत
जहां घरेलू शेयर बाजार दबाव में रहा, वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूती का रुख देखने को मिला। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स करीब 0.84 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,994 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। जापान का निक्केई भी 0.34 प्रतिशत की बढ़त के साथ 53,870 पर पहुंच गया।हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स 0.29 प्रतिशत चढ़कर 26,706 के स्तर पर रहा, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स 0.27 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,133 पर कारोबार कर रहा था। अमेरिकी बाजारों में भी गुरुवार को मजबूती देखने को मिली थी। डाउ जोंस 0.63 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुआ था, जबकि नैस्डेक कंपोजिट और एसएंडपी 500 में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई।
FII की बिकवाली, DII बने सहारा
निवेश प्रवाह की बात करें तो 22 जनवरी को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बाजार में बिकवाली की। एफआईआई ने करीब 2,549 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 4,222 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को कुछ हद तक सहारा दिया।आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 में एफआईआई ने कुल 34,350 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे, जबकि डीआईआई ने 79,620 करोड़ रुपये की मजबूत खरीदारी की थी। इससे साफ है कि घरेलू निवेशक बाजार में स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
पिछले सत्र में दिखी थी तेजी
इससे पहले गुरुवार को बाजार में अच्छी मजबूती देखने को मिली थी। सेंसेक्स 398 अंक की तेजी के साथ 82,307 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 132 अंक चढ़कर 25,290 के स्तर पर बंद हुआ था। हालांकि बजट से पहले मौजूदा सत्र में बाजार ने फिर से सतर्क रुख अपना लिया है।कुल मिलाकर बजट से जुड़ी उम्मीदें और वैश्विक संकेत आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
