बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि शॉर्ट टर्म में गिरावट की आशंका बनी हुई है, लेकिन भारत की बुनियादी स्थिति यानी ‘मैक्रो स्टोरी’ अभी भी बहुत मजबूत है। आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर की तन्वी कंचन और पीएल कैपिटल के विक्रम कसाट जैसे जानकारों का कहना है कि जनवरी में 1.71 लाख करोड़ रुपये का शानदार जीएसटी कलेक्शन और सरकारी बैंकों के मजबूत तिमाही नतीजे इस बात के सबूत हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था सही दिशा में है। श्रीराम वेल्थ के नवल कगलवाला के अनुसार, पश्चिम एशिया का संकट भारत के लिए एक अवसर भी बन सकता है। जब वैश्विक बाजार असुरक्षित महसूस करते हैं, तो भारत जैसे मजबूत घरेलू मांग वाले देश ‘सेफ हेवन’ बनकर उभरते हैं। पिछले शुक्रवार के आंकड़े बताते हैं कि जहाँ विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 12,293 करोड़ रुपये की बड़ी खरीदारी करके बाजार को सहारा देने की कोशिश की।
मौजूदा हालातों में एक्सपर्ट्स निवेशकों को संयम और अनुशासन बरतने की सलाह दे रहे हैं। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि यह घबराहट में आकर अपनी होल्डिंग्स बेचने का समय नहीं है। निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करें, कर्ज लेकर निवेश (लेवरेज पोजीशन) करने से बचें और अपने रिस्क मैनेजमेंट पर ध्यान केंद्रित करें। एसआईपी SIP के माध्यम से निवेश करने वालों के लिए यह संदेश है कि वे अपना निवेश जारी रखें, क्योंकि ऐतिहासिक रूप से ऐसी ही गिरावटें लंबी अवधि में संपत्ति निर्माण Wealth Creation का आधार बनती हैं। रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजित मिश्रा ने भी निवेशकों को सावधानी बरतने और फिलहाल अपनी पोजीशन को हल्का रखने की सलाह दी है।
