यह योजना क्या है?
इस स्कॉबी के तहत बैंकों और वित्तीय ग्राहकों को मफाइनेंस के लिए नीचे दिए गए ऋण पर ऋण कवर दिया जाएगा। यह सोसाइटी नेशनल क्रेडिट ट्रस्ट ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड के माध्यम से प्रदान की जाएगी, जिससे लोन डिफॉल्ट की स्थिति में जोखिम कम होगा।
सरकार का मकसद साफ है- बैंकों को गैर-लाभकारी बनाना ताकि वे एनबीएफसी-एमएफआई और अन्य माइक्रोफाइनेंस कंपनियों को भारी कर्ज दे सकें, जिससे यह संस्थान आसानी से लोन की सुविधा तक पहुंच सके।
20,000 करोड़ रुपए तक कर्ज बढ़ाने का लक्ष्य
इस योजना के तहत सरकार ने करीब 20,000 करोड़ रुपये तक का कर्ज बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इससे ग्रामीण और फ़्रैंचाइज़ी के लोगों को सस्ती और आसान ऋण मिलें मिलें, जिससे छोटे और उद्यमियों को बढ़ावा मिले।
कितना उत्पादक कवर?
सरकार ने अलग-अलग स्थानों के लिए डेमोक्रेट कवर तय किया है-
छोटे अपलोड के लिए: 80% तक
मध्यम दर्जे के लिए: 75% तक
बड़े अपलोड के लिए: 70% तक
इस कर्ज़ के रिलीज़ वाले प्रोजेक्ट रिस्क का काफी हद तक कम हो जाएगा और वे ज्यादातर संपत्तियों के साथ लोन दे देंगे।
यह जरूरी क्यों था स्काइप?
हाल के समय में मैकिनेंस सेक्टर पर वित्तीय दबाव बढ़ा है, जिसके तहत बैंकों ने कर्ज लेने की सलाह दी थी। इसका सीधा असर छोटे बैंकों पर पड़ा, जिसमें लोन मिलना मुश्किल हो गया। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा तय के अनुसार यह योजना नए और पुराने दोनों तरह के ऋण बैंकों को कवर करने के लिए है, जिससे सेक्टर में स्थिरता आएगी।
वित्तीय समावेशन को बढ़ावा
माइक्रोफाइनेंस सर्विसेज सेक्टर के लिए लोगों की जीवन रेखा है, जो पारंपरिक उपकरणों से दूर हैं। यह योजना न केवल छोटे पैमाने पर निवेशकों को आकर्षित करने के लिए है, बल्कि देश में वित्तीय समावेशन को भी नई नजर रखने के लिए।
कब तक लागू रहेगी योजना?
यह योजना 30 जून 2026 तक लागू होगी या तब तक, जब तक 20,000 करोड़ रुपये तक का कर्ज़ कवर नहीं दिया जाएगा-जो भी पहले हो।
