फिक्स्ड-टर्म और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को लाभ
नए नियमों के अनुसार, फिक्स्ड-टर्म और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी अब अपनी नौकरी की अवधि के आधार पर ग्रेच्युटी पाने के पात्र होंगे। फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी वे हैं जिन्हें कंपनियां एक तय समय के लिए लिखित कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त करती हैं, जो आमतौर पर एक या दो साल का हो सकता है। अब उनके ग्रेच्युटी की राशि उनकी सेवा अवधि के अनुरूप तय होगी। यह बदलाव विशेष रूप से उन कर्मचारियों के लिए लाभकारी है, जो छोटे या सीमित कॉन्ट्रैक्ट पर काम करते हैं। इससे उन्हें भी लंबे समय तक नौकरी न होने पर भी कानूनी रूप से ग्रेच्युटी का हक मिलेगा।
स्थायी कर्मचारियों के लिए नियम
स्थायी या परमानेंट कर्मचारियों के लिए नियम अभी भी पुराने अनुसार हैं, यानी 5 साल की लगातार सेवा पूरी करना अनिवार्य है। हालांकि, मृत्यु या दिव्यांगता के मामलों में स्थायी कर्मचारियों को भी एक साल की सेवा पूरी होने के बाद ग्रेच्युटी का अधिकार मिल सकता है। इससे कर्मचारियों को अप्रत्याशित परिस्थितियों में भी सुरक्षा का आश्वासन मिलेगा।
ग्रेच्युटी की गणना और वेतन संरचना
नए नियमों के अनुसार ग्रेच्युटी की गणना वेतन के आधार पर की जाएगी। इसमें कर्मचारी के कुल CTC (कॉस्ट-टू-कंपनी) का कम से कम 50 प्रतिशत शामिल होगा। वेतन में बेसिक सैलरी, महंगाई भत्ता (DA), रिटेनिंग अलाउंस और अन्य भत्ते शामिल होंगे। जिन कर्मचारियों का पहले बेसिक वेतन कम था, उनके लिए अब ग्रेच्युटी की राशि में पर्याप्त बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
कानूनी मान्यता और लाभ
ग्रेच्युटी एक कानूनी रूप से अनिवार्य एकमुश्त भुगतान है, जो नियोक्ता अपने कर्मचारी को लंबी सेवा या रिटायरमेंट के सम्मान में देता है। अब यह लाभ छोटे समय की नौकरी करने वाले फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए भी उपलब्ध होगा। इसका मतलब है कि 21 नवंबर 2025 या उसके बाद जॉइन करने वाले कर्मचारी एक साल की लगातार सेवा पूरी होने के बाद ग्रेच्युटी का दावा कर सकेंगे।
संस्थानों की जिम्मेदारी
श्रम मंत्रालय ने सभी संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे अपने अकाउंटिंग नियमों के अनुसार इस प्रावधान को लागू करें। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कर्मचारियों को उनके हक का भुगतान समय पर और सही तरीके से मिले। यह बदलाव विशेष रूप से औपचारिक सेक्टर के कर्मचारियों के लिए राहत और सुरक्षा का जरिया साबित होगा।
