नई दिल्ली । बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड को गाय के घटिया घी बेचने के आरोप का सामना करना पड़ रहा है। पिथौरागढ़ की एक अदालत ने 19 नवंबर को इस मामले में फैसला सुनाते हुए पतंजलि के घी के निर्माता वितरक और खुदरा विक्रेता पर कुल 1.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह मामला खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत दर्ज किया गया था जिसमें 2020 में लिए गए गाय के घी के सैंपल को फेल घोषित किया गया था। हालांकि पतंजलि ने इस फैसले को त्रुटिपूर्ण और विधि विरुद्ध करार दिया है और अदालत के आदेश के खिलाफ अपील करने का निर्णय लिया है।
मामले की पृष्ठभूमि
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में अक्टूबर 2020 में पतंजलि गाय के घी के सैंपल लिए गए थे जिन्हें रुद्रपुर स्थित राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया। जहां सैंपल असफल घोषित हुए। इसके बाद व्यापारियों ने 2021 में केंद्रीय खाद्य प्रयोगशाला से सैंपल की जांच कराई और वहां भी 2022 में सैंपल फेल हो गए। पिथौरागढ़ के सहायक खाद्य सुरक्षा आयुक्त आरके शर्मा ने इस पूरे मामले की जानकारी दी और कहा कि इसके बाद फरवरी 2022 में खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने इस मामले को कोर्ट में पेश किया।
अदालत ने इस मामले में 19 नवंबर को फैसला सुनाया जिसके तहत पतंजलि घी के निर्माता और वितरक पर क्रमशः 1.25 लाख और 15,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। हालांकि इस फैसले को लेकर पतंजलि ने अपनी सफाई पेश करते हुए इसे पूरी तरह से गलत और अवैध बताया।
पतंजलि का बयान
पतंजलि ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पूर्व में ट्विटर पर एक बयान जारी किया जिसमें कंपनी ने अदालत के फैसले को खारिज किया। पतंजलि के मुताबिक इस फैसले में कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों की अनदेखी की गई है जिनकी वजह से यह आदेश पूरी तरह से त्रुटिपूर्ण है। कंपनी ने कहा कि रेफरल प्रयोगशाला की मान्यता नहीं थी जिस प्रयोगशाला में सैंपल की जांच की गई वह नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेटरीज से मान्यता प्राप्त नहीं थी। ऐसे में उस परीक्षण का कानूनी रूप से कोई महत्व नहीं है।
अधिकारहीन परीक्षण मानक जिन मानकों के आधार पर घी के सैंपल को असफल घोषित किया गया वे उस समय लागू नहीं थे और इसलिए उनका प्रयोग कानूनी रूप से गलत था। परीक्षण की अवधि समाप्त सैंपल की टेस्टिंग एक्सपायरी डेट के बाद की गई जो कि भी कानूनी रूप से अमान्य है। पतंजलि ने कहा कि कोर्ट ने इन महत्वपूर्ण तर्कों पर विचार किए बिना आदेश पारित किया, जो विधि के अनुरूप नहीं है। कंपनी का कहना है कि इस मामले में घी की गुणवत्ता पर कोई भी प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की गई है केवल रेफ्रिजरेशन मिल्क वैल्यू के मानक से मामूली अंतर पाया गया है।
RM Value और घी की गुणवत्ता
पतंजलि के अनुसार RM Value घी में मौजूद volatile fatty acid गर्म करने पर उड़नशील तत्व का स्तर दर्शाता है जो एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और घी की गुणवत्ता पर इसका कोई असर नहीं पड़ता। कंपनी ने यह भी कहा कि RM Value का मानक क्षेत्रीय और जलवायु परिस्थितियों के आधार पर बदलता रहता है और यह राष्ट्रीय स्तर पर भी भिन्न हो सकता है। सरकारी नियामक संस्था FSSAI भी इस मानक को समय-समय पर बदलती रहती है।
पतंजलि ने अपने घी के उत्पाद को पूरे देश में उच्च गुणवत्ता के मानकों के आधार पर बेचने का दावा किया और कहा कि कंपनी का विश्वास है कि फूड सेफ्टी ट्राइब्यूनल में इस मामले का सही निवारण होगा। पतंजलि पर आरोप यह है कि उन्होंने उपभोक्ताओं को घटिया गुणवत्ता का घी बेचा लेकिन कंपनी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे कानूनी और तकनीकी दृष्टि से गलत बताया है। अब यह देखना होगा कि फूड सेफ्टी ट्राइब्यूनल इस मामले में क्या निर्णय देता है और क्या पतंजलि को यह आरोप साबित करने में सफलता मिलती है या नहीं।
