इस IPO में कोई नया शेयर जारी नहीं होगा। यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल OFS के जरिए लाया जाएगा, यानी कंपनी के मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी का हिस्सा बेचेंगे। कंपनी की अनुमानित वैल्यूएशन 15 बिलियन डॉलर लगभग ₹1.33 लाख करोड़ आंकी गई है। यह पेटीएम के ₹18,000 करोड़ IPO के बाद डिजिटल पेमेंट सेक्टर का भारत का दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम होगा।
IPO के जरिए वॉलमार्ट, टाइगर ग्लोबल और माइक्रोसॉफ्ट जैसे निवेशक अपनी संयुक्त हिस्सेदारी का लगभग 10% बेच सकते हैं। वर्तमान में वॉलमार्ट का शेयर फोनपे में 73% से अधिक है। IPO प्रक्रिया को सुचारु रूप से पूरा करने के लिए कंपनी ने कोटक महिंद्रा कैपिटल, सिटीग्रुप, मॉर्गन स्टेनली और जेपी मॉर्गन जैसे प्रमुख निवेश बैंकों को सलाहकार नियुक्त किया है।फोनपे की सबसे बड़ी ताकत उसका UPI कारोबार है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश के कुल डिजिटल भुगतान बाजार में फोनपे की हिस्सेदारी लगभग 45% है, जबकि गूगल पे के पास 35% की हिस्सेदारी है। फोनपे हर महीने लगभग 1,000 करोड़ लेनदेन प्रोसेस करता है, जिनका कुल मूल्य ₹12 लाख करोड़ से अधिक है। कंपनी के पास 53 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं।
फोनपे ने इस साल 16 अप्रैल 2025 को खुद को प्राइवेट से पब्लिक लिमिटेड कंपनी में बदला, जो शेयर बाजार में लिस्टिंग के लिए जरूरी प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे पहले दिसंबर 2022 में कंपनी ने अपना मुख्यालय सिंगापुर से भारत स्थानांतरित किया था और अपने नॉन-पेमेंट कारोबार को अलग सब्सिडियरी में विभाजित किया था।विशेषज्ञों का मानना है कि यह IPO डिजिटल पेमेंट सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा। DRHP दाखिल होने के बाद इश्यू की समयसीमा, मूल्य निर्धारण और निवेशकों की रुचि के बारे में और स्पष्टता सामने आएगी। वैश्विक निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी और भारतीय फिनटेक सेक्टर की परिपक्वता को देखते हुए यह इश्यू पब्लिक और संस्थागत निवेशकों दोनों के लिए आकर्षक अवसर होगा।
