2015 में हुई थी शुरुआत, ‘फंडिंग द अनफंडेड’ था लक्ष्य
इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत साल 2015 में Narendra Modi ने की थी। इसका मुख्य उद्देश्य उन लोगों को बिना गारंटी के लोन उपलब्ध कराना था, जो पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम से बाहर रह जाते थे। योजना के तहत छोटे गैर-कॉरपोरेट और गैर-कृषि व्यवसायों को 20 लाख रुपए तक का कर्ज दिया जाता है, जिससे वे अपना कारोबार शुरू या विस्तार कर सकें।
एमएसएमई सेक्टर में आया बड़ा बदलाव
केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने कहा कि पीएम मुद्रा योजना ने एमएसएमई और छोटे उद्यमियों के लिए क्रेडिट सिस्टम को पूरी तरह बदल दिया है। उनके अनुसार, पिछले एक दशक में देश में एक “शांत क्रांति” देखने को मिली है, जहां करोड़ों लोगों ने आत्मविश्वास के साथ अपना व्यवसाय शुरू किया और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया।
महिलाओं और नए उद्यमियों को मिला बड़ा लाभ
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस योजना का सबसे ज्यादा फायदा महिलाओं को मिला है। कुल लोन में लगभग दो-तिहाई हिस्सा महिलाओं को दिया गया है, जबकि करीब 20 प्रतिशत लोन ऐसे लोगों को मिला है जिन्होंने पहली बार अपना व्यवसाय शुरू किया। नए उद्यमियों को ही करीब 12.15 करोड़ लोन दिए गए हैं, जिनकी कुल राशि लगभग 12 लाख करोड़ रुपए है।
वंचित वर्गों के लिए बना सहारा
वित्त राज्य मंत्री Pankaj Chaudhary ने बताया कि यह योजना सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए भी बड़ी राहत साबित हुई है। अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लोगों को इससे बड़े पैमाने पर लाभ मिला है, जो कुल लाभार्थियों का करीब 51 प्रतिशत हैं। वहीं महिलाओं की हिस्सेदारी 67 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा संकेत है।
चार श्रेणियों में मिलता है लोन
पीएम मुद्रा योजना के तहत लाभार्थियों की जरूरत के अनुसार चार कैटेगरी बनाई गई हैं—
शिशु: 50,000 रुपए तक
किशोर: 50,000 से 5 लाख रुपए
तरुण: 5 लाख से 10 लाख रुपए
तरुण प्लस: 10 लाख से 20 लाख रुपए
इन श्रेणियों के जरिए मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग, सर्विस सेक्टर और कृषि से जुड़े कार्यों के लिए टर्म लोन और वर्किंग कैपिटल उपलब्ध कराया जाता है।
विकसित भारत के लक्ष्य में अहम योगदान
सरकार का मानना है कि Pradhan Mantri Mudra Yojana आने वाले समय में भी उद्यमिता को बढ़ावा देती रहेगी और 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह योजना न केवल आर्थिक गतिविधियों को गति दे रही है, बल्कि लाखों लोगों को आत्मनिर्भर बनाकर देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रही है।
