वित्तीय सहायता और लक्ष्य
सरकार के अनुसार, इस योजना में घरों के निर्माण और लाभार्थियों को समय पर सहायता देने के लिए अब तक कुल 4,03,886 करोड़ रुपए जारी किए जा चुके हैं। योजना का अंतिम लक्ष्य 2029 तक कुल 4.95 करोड़ घर बनाना है।
लाभार्थी-आधारित निर्माण
पीएमएवाई-जी लाभार्थी-आधारित है, यानी परिवार खुद अपने घर का निर्माण करते हैं और वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खाते में जाती है। योजना में घरों की जियो-टैगिंग की जाती है, जिसमें समय और तारीख के साथ फोटो अपलोड की जाती है। इससे रियल-टाइम निगरानी संभव होती है और यह सुनिश्चित होता है कि घर तय मानकों के अनुसार बन रहे हैं।
एआई और तकनीक से बढ़ी पारदर्शिता
योजना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी टूल्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। AI मॉडल घरों की दीवार, छत, दरवाजे और खिड़कियों जैसी चीजों की पहचान कर सही तस्वीर को मंजूरी के लिए चुनते हैं। इससे केवल पूरी तरह तैयार घरों को ही पूर्ण माना जाता है।
लाभार्थियों की पहचान आधार आधारित-एआई फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए होती है, जिसमें आंख झपकने और मूवमेंट डिटेक्शन जैसी तकनीकें भी शामिल हैं। इससे सुनिश्चित होता है कि केवल योग्य लोग ही योजना का लाभ प्राप्त करें।
अन्य योजनाओं के साथ समन्वय
पीएमएवाई-जी को स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण, जल जीवन मिशन और पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना जैसी अन्य योजनाओं के साथ जोड़ा गया है, ताकि लाभार्थियों को ज्यादा सुविधाएं मिल सकें।
लगातार प्रगति
पिछले 10 वर्षों में पीएमएवाई-जी ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है। हर साल बड़ी संख्या में घरों का निर्माण पूरा हुआ है, जो इसकी स्थिर प्रगति को दर्शाता है। AI और मशीन लर्निंग तकनीकों के इस्तेमाल से निगरानी और ज्यादा सटीक हो गई है, जिससे फर्जीवाड़े की संभावना कम हुई है।
