नई दिल्ली।
वित्तीय अनुशासन को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। रेगुलेटरी नियमों का लगातार उल्लंघन करने पर आरबीआई ने 35 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है। इस कार्रवाई के साथ ही केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट कर दिया है कि ये कंपनियां अब किसी भी तरह का एनबीएफसी से जुड़ा कारोबार नहीं कर सकेंगी। यह फैसला आम निवेशकों और कर्ज लेने वालों के लिए भी एक गंभीर चेतावनी के रूप में भी देखा जा रहा है।दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक ने यह कार्रवाई आरबीआई एक्ट, 1934 की धारा 45-IA (6) के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए की है। केंद्रीय बैंक के अनुसार ये कंपनियां लंबे समय से जरूरी शर्तों और नियामकीय मानकों का पालन नहीं कर रही थीं, जिसके चलते उन्हें एनबीएफसी के रूप में काम करने की अनुमति वापस ले ली गई।
मामले में सामने आया है कि आरबीआई द्वारा सात जनवरी 2026 को जारी सर्कुलर में बताया गया है कि इन कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने के आदेश अलग-अलग तारीखों पर 9 दिसंबर 2025 से 31 दिसंबर 2025 के बीच जारी किए गए थे। इसका सीधा मतलब है कि इन तारीखों के बाद ये कंपनियां कानूनी रूप से किसी भी तरह का एनबीएफसी कारोबार नहीं कर सकतीं।
क्यों हुई इतनी बड़ी कार्रवाई?
आरबीआई के मुताबिक, जिन 35 एनबीएफसी के खिलाफ यह कदम उठाया गया है, उन्होंने कई अहम नियमों का उल्लंघन किया। इनमें न्यूनतम नेट ओन्ड फंड (NOF) बनाए न रखना, पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CRAR) का पालन न करना, समय पर वित्तीय रिपोर्टिंग न करना और एसेट क्लासिफिकेशन से जुड़े मानकों की अनदेखी शामिल है। कई कंपनियां लंबे समय से निष्क्रिय (डोरमेंट) स्थिति में थीं, लेकिन इसके बावजूद उनका रजिस्ट्रेशन बरकरार था, जो वित्तीय प्रणाली के लिए जोखिम पैदा कर रहा था।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई आरबीआई के ‘स्केल-बेस्ड रेगुलेशन’ और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की नीति का हिस्सा है। इससे पहले भी 2023 और 2024 में कई एनबीएफसी के लाइसेंस रद्द किए जा चुके हैं।
ये है 35 NBFCs की पूरी सूची
सत्य प्रकाश कैपिटल इन्वेस्टमेंट लिमिटेड
AG सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड
ALB लीजिंग एंड फाइनेंस लिमिटेड
ATM क्रेडिट एंड इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड
कॉर्पोरेट कैपिटल सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
डेसिसिव फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड
डिवाइन इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड
लिबर्टी प्राइवेट लिमिटेड सेल्स
पर्ल्स हायर परचेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड
क्वासर इंडिया फिनकैप प्राइवेट लिमिटेड
सनलाइफ सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड
सनराइज मैन्युफैक्चरिंग कंपनी लिमिटेड
स्वितो फाइनेंस एंड एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड
त्रिवेणी विनिमय प्राइवेट लिमिटेड
ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी मार्केटिंग लिमिटेड
यूनिट्रॉन फिनलीज लिमिटेड
वीरा सिक्योरिटीज एंड फिनलीज प्राइवेट लिमिटेड
विनी फाइनेंशियल एंड मैनेजमेंट कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड
शिवोम इन्वेस्टमेंट एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड
अधिनाथ इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड
एग्रोहा सेविंग्स लिमिटेड
अहुसंस फाइनेंस एंड इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड
अल्टर इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड
एसोसिएटेड लीजिंग लिमिटेड
अटलांटिक लीजिंग लिमिटेड
BHL फॉरेक्स एंड फिनलीज लिमिटेड
भरतपुरिया फाइनेंस एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड
दादा देव फाइनेंस एंड लीजिंग प्राइवेट लिमिटेड
ईस्ट दिल्ली लीजिंग प्राइवेट लिमिटेड
इकोनॉमिक कैपिटल सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
ESN फाइनेंस एंड कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड
FMI इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड
गणपति फिनकैप सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड
गुडवर्थ सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड
गोपाल ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड
बाजार और निवेशकों पर असर
आरबीआई के इस कदम को वित्तीय बाजार में सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। कमजोर और नियमों का पालन न करने वाली कंपनियों के बाहर होने से एनबीएफसी सेक्टर की साख मजबूत होगी। दूसरी ओर इससे जुड़ा एक पक्ष ये भी है कि जिन निवेशकों या ग्राहकों का पैसा इन कंपनियों में फंसा है, उनके लिए यह स्थिति चिंता का विषय हो सकती है। ऐसे मामलों में निवेशकों को कानूनी रास्ता अपनाना पड़ सकता है, क्योंकि आरबीआई इन कंपनियों के लेन-देन की गारंटी नहीं देता।
आम जनता के लिए आरबीआई की अहम सलाह
आरबीआई ने इस मौके पर आम लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि किसी भी निवेश, लोन या वित्तीय लेन-देन से पहले यह जरूर जांच लें कि संबंधित कंपनी आरबीआई में पंजीकृत है या नहीं। इसके लिए आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध एनबीएफसी की सूची देखी जा सकती है।
