अगले हफ्ते बाजार की दिशा तय करने में सबसे बड़ी भूमिकाअमेरिकी फेडरल रिजर्व की होगी।18 फरवरी को फेडरल रिजर्व की हालिया नीति बैठक के मिनट्स जारी होने वाले हैं। दुनिया भर के निवेशक यह जानने को बेताब हैं कि महंगाई और ब्याज दरों को लेकर अमेरिकी रुख क्या रहने वाला है। इसके साथ ही अमेरिका कीजीडीपी के आंकड़े भी सामने आएंगे, जिसका सीधा असर डॉलर की मजबूती और विदेशी संस्थागत निवेशकों यानीएफआईआई की गतिविधियों पर पड़ेगा। भारतीय संदर्भ में बात करें तो20 फरवरी का दिन काफी अहम है, जबभारतीय रिजर्व बैंक आरबीआई अपनी मौद्रिक नीति बैठक के मिनट्स साझा करेगा। ये मिनट्स यह संकेत देंगे कि भारत में ब्याज दरों की भविष्य की दिशा क्या होगी और क्या आरबीआई ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए कोई नया कदम उठा सकता है।
बाजार में इस समय सबसे ज्यादा दबावआईटी सेक्टर पर देखा जा रहा है। पिछले सप्ताह निफ्टी आईटी इंडेक्स में करीब8 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह बाजार का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर बन गया।टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज TCS,इंफोसिस औरविप्रो जैसी दिग्गज कंपनियों के निवेशकों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। इसकी मुख्य वजहजनरेटिव और एजेंटिक एआई तकनीक का तेजी से बढ़ता प्रभाव है। बाजार को डर है कि यह नई तकनीक पारंपरिक आउटसोर्सिंग सेवाओं की मांग को कम कर सकती है, जिससे इन कंपनियों की भविष्य की कमाई पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। अगले सप्ताह भी निवेशकों की नजर इसी बात पर रहेगी कि क्या आईटी शेयरों में कोई सुधार आता है या बिकवाली और गहरी होती है।
तकनीकी मोर्चे पर देखें तो निफ्टी के लिए25,300 का स्तर एक बेहद मजबूत सहारा यानी सपोर्ट का काम कर रहा है। यदि निफ्टी इस स्तर से नीचे फिसलता है, तो बाजार में और बड़ी गिरावट की संभावना बढ़ जाएगी। दूसरी ओर,25,700 का स्तर एक बड़ी बाधा यानी रेजिस्टेंस के रूप में सामने खड़ा है। अगर बाजार इस आंकड़े को पार करने में सफल रहता है, तभी हम कह सकते हैं कि तेजी के दिन वापस लौट आए हैं। ब्रोकरेज कंपनियों की सलाह है कि निवेशकों को इस समयस्ट्रिक्ट स्टॉप लॉस के साथ बहुत ही संभलकर कदम उठाना चाहिए और एक सीमित दायरे में रहकर ही ट्रेडिंग की रणनीति बनानी चाहिए।
इसके अलावा, विदेशी निवेशकों की चाल भी बहुत मायने रखेगी। हालांकि फरवरी में अब तकएफआईआई ज्यादातर दिनों में शुद्ध खरीदार रहे हैं और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते ने उनके भरोसे को मजबूत किया है, लेकिन एआई से जुड़ी वैश्विक चिंताओं ने उन्हें फिर से सतर्क कर दिया है। साथ ही, सोना और चांदी की कीमतों में आई स्थिरता भी कमोडिटी बाजार के माध्यम से इक्विटी बाजार को प्रभावित कर सकती है। कुल मिलाकर, अगला हफ्ता डेटा, तकनीक और वैश्विक संकेतों का एक मिला-जुला पैकेज लेकर आ रहा है, जो तय करेगा कि क्या भारतीय बाजार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ेगा या गिरावट का यह सिलसिला अभी जारी रहेगा।
