1 अप्रैल के आंकड़े दिखाएंगे अर्थव्यवस्था की सेहत
1 अप्रैल को ऑटो कंपनियां अपनी बिक्री के आंकड़े जारी करेंगी, वहीं सरकार गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) कलेक्शन डेटा पेश करेगी। ये आंकड़े देश में मांग (डिमांड) की स्थिति का साफ संकेत देंगे। अगर आंकड़े मजबूत रहे, तो बाजार में पॉजिटिव माहौल बन सकता है।
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ना बना चिंता का कारण
वैश्विक स्तर पर तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुकी है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 80% तेल आयात करता है, इसलिए कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई और बाजार दोनों पर दबाव बढ़ सकता है।
मध्य पूर्व तनाव से बढ़ते अनिश्चितता
यूनाइटेड स्टेट्स, इज़राइल और ईरान के बीच जारी तनाव और संघर्ष का असर भी बाजार पर साफ दिख रहा है। इस जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के चलते निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं।
FII का रुख बना रहेगा निवेशक
विदेशी निवेशक (FII) पिछले कई हफ्तों से लगातार बिकवाली कर रहे हैं। अगर यह ट्रेंड जारी रहता है, तो बाजार पर दबाव बना रह सकता है। वहीं, अगर FII खरीदारी शुरू करते हैं, तो बाजार में तेजी से देखने को मिल सकती है।
पिछले हफ्ते बाजार में रही गिरावट
23 से 27 मार्च के बीच बाजार में कमजोरी देखी गई:
निफ्टी 50 करीब 1.28% गिरकर 22,819 पर बंद हुआ
BSE सेंसेक्स 1.27% गिरकर 73,583 पर पहुंच गया
मिडकैप और स्मॉलकैप रिकवरी में भी गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार का सेंटिमेंट कमजोर रहा।
किन सेक्टर्स पर रहा दबाव, कौन चमका?
पिछले हफ़्ते:
डिफेंस, PSU बैंक, रियल्टी और मेटल सेक्टर में बड़ी गिरावट
IT, हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर में तेज़ी से गिरावट
इससे साफ़ है कि इन्वेस्टर डिफेंसिव सेक्टर की ओर झुक रहे हैं।
इन्वेस्टर के लिए क्या है स्ट्रैटेजी?
आने वाला हफ़्ता डेटा और ग्लोबल लेवल पर आधारित रहेगा। ऐसे में:
जल्दबाजी में निवेश से बचें
बड़े इवेंट्स पर नज़र रखें
सेक्टर-बेस्ड स्ट्रैटेजी अपनाएं
