नई दिल्ली । मंगलवार को शेयर बाजारों में गिरावट का रुख देखा गया। विदेशों से मिले मिश्रित संकेतों और घरेलू स्तर पर निवेशकों के बीच सतर्कता की भावना ने बाजार को दबाव में डाला। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 250.48 अंक यानी 0.30 प्रतिशत गिरकर 83 627.69 अंक पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी 57.95 अंक यानी 0.22 प्रतिशत गिरकर 25, 732.30 अंक पर रहा विदेशी बाजारों से मिले संकेतों में मिश्रित रुझान देखे गए जिससे घरेलू निवेशकों ने सतर्कता बरती। एशियाई और यूरोपीय बाजारों में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई जो भारतीय बाजारों पर असर डालने का कारण बनी। इसके अलावा घरेलू स्तर पर भी कुछ प्रमुख कंपनियों के तिमाही परिणामों को लेकर निवेशकों के बीच अनिश्चितता बनी रही जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ा।
इस गिरावट के बावजूद विश्लेषकों का मानना है कि यह कोई लंबी अवधि की मंदी नहीं है। वे मानते हैं कि आगामी दिनों में बाजार में पुनः सुधार की संभावना हो सकती है खासकर अगर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियाँ बेहतर होती हैं। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी पोर्टफोलियो को सावधानीपूर्वक देखें और लंबी अवधि के लिए निवेश करें। वहीं कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी पहलू मजबूत हैं और आने वाले समय में सकारात्मक रुझान दिख सकते हैं। सरकार के आर्थिक सुधारों और कॉरपोरेट क्षेत्र में संभावित वृद्धि को ध्यान में रखते हुए बाजार में भी सुधार की उम्मीद है। हालांकि फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा और निवेशकों को सतर्क रहना होगा।
इसी के साथ मंगलवार को मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी हल्की गिरावट आई। मिडकैप इंडेक्स में 0.32 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.25 प्रतिशत की गिरावट आई। बैंकों और वित्तीय कंपनियों के शेयरों में भी दबाव देखा गया जबकि ऊर्जा और कच्चे तेल से संबंधित कंपनियों में कुछ राहत मिली। कुल मिलाकर मंगलवार का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजारों के लिए नकारात्मक रहा हालांकि आने वाले दिनों में कुछ सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है। निवेशकों के लिए सलाह है कि वे बाजार की मौजूदा स्थिति को समझते हुए अपने निवेश निर्णय लें और लघु अवधि के उतार-चढ़ाव से बचने के लिए धैर्य रखें।
