इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोना 10 ग्राम पर घटकर 1,65,795 रुपए पर आ गया था, जबकि इससे पहले यह 1,75,340 रुपए पर बंद हुआ था। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने की वजह से निवेशकों ने तेजी से बिकवाली शुरू की। डॉलर के मजबूती का मुख्य कारण अमेरिकी राष्ट्रपति ने फेडरल रिजर्व चेयरमैन के रूप में केविन वार्श के नाम की घोषणा करना बताया गया है। केविन वार्श महंगाई को काबू में रखने के लिए सख्त रुख रखते हैं और कम ब्याज दरों के पक्ष में नहीं माने जाते।
विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ, वास्तविक बॉन्ड यील्ड बढ़ीं और सोने व चांदी में लीवरेज्ड पोजीशन, जिन्हें करेंसी वैल्यू घटने से बचाव के तौर पर लिया गया था, तेजी से खत्म कर दी गई। इसके चलते बाजार में अरबों डॉलर का मार्केट वैल्यू साफ हुआ और कमजोर निवेशक बाहर हो गए। विशेषज्ञों के मुताबिक यह गिरावट लंबी अवधि की मंदी की शुरुआत नहीं है बल्कि एक जरूरी सुधार प्रक्रिया है।लंबी अवधि के बुनियादी कारक अब भी मजबूत बने हुए हैं। केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोने की खरीद, ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहनों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक्स में बढ़ती औद्योगिक मांग के कारण चांदी की आपूर्ति में संरचनात्मक कमी बनी हुई है। यही वजह है कि विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी अवधि में सोने और चांदी के लिए तेजी का नजरिया बरकरार है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस गिरावट के बाद जरूरत से ज्यादा सट्टेबाजी और जोखिम भरे निवेश बाहर हो गए हैं जिससे आगे चलकर बाजार स्थिर तरीके से ऊपर जा सकता है। चांदी की कीमत यदि 3 लाख से 3.10 लाख रुपए प्रति किलो के स्तर पर आती है तो वहां से दोबारा खरीदारी शुरू हो सकती है। इसके चलते चांदी संभावित रूप से 3.40 लाख से 3.50 लाख रुपए प्रति किलो तक पहुंच सकती है।इस गिरावट को निवेशकों के लिए मौका भी माना जा रहा है क्योंकि बाजार में स्थिरता आने के बाद धातुओं की कीमतें फिर से ऊपर जा सकती हैं।
