नियमों की अनदेखी या प्रशासन की गलती
महाराष्ट्र में एक कानून के तहत 1995 में लागू किए गए महाराष्ट्र नगर निगम और नगर परिषद नगर पंचायत और औद्योगिक टाउनशिप द्वितीय संशोधन अधिनियम के अनुसार दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवार नगर निगम चुनावों में भाग नहीं ले सकते। बावजूद इसके पुष्पा वाघमारे का नामांकन स्वीकार किया गया। महिला उम्मीदवार ने खुद अपने एफिडेविट में अपने चार बच्चों का विवरण दिया था और यह जानकारी स्पष्ट रूप से चुनाव अधिकारियों के पास थी, फिर भी उनका आवेदन मंजूर कर लिया गया।पुष्पा वाघमारे ने इस विवाद पर कहा मुझे नियमों के बारे में जानकारी नहीं थी क्योंकि मैं पहली बार चुनाव लड़ रही हूं। मेरा नामांकन स्वीकार कर लिया गया है और मैं अपनी जिम्मेदारी नहीं उठाऊंगी अगर इसमें कोई गलती हुई है। मैं चुनाव में बनी रहूंगी और मुझे बेवजह परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
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पुष्पा वाघमारे का समाज में अच्छा प्रभाव
पुष्पा वाघमारे को उनके क्षेत्र में एक छोटे से कैटरिंग व्यवसायी के रूप में जाना जाता है और वे एक समाजसेवी भी हैं। स्थानीय महिलाओं के बीच उनकी लोकप्रियता है, और उनका दावा है कि उनके क्षेत्र में जल निकासी की समस्या है, जो भारी बारिश के दौरान बाढ़ का कारण बनती है। वे इन समस्याओं को हल करने के लिए चुनाव में उतर रही हैं।
नागपुर की चुनावी स्थिति और विवाद
नागपुर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह नगर है। 2017 में हुए नगर निगम चुनाव तक भाजपा ने इस नगर निगम पर लगातार तीन कार्यकालों तक अपना नियंत्रण बनाए रखा था। अब जब NCP ने इस सीट पर अपनी उम्मीदवार उतारी है तो यह मामला और भी संवेदनशील हो गया है। हालांकि यह साफ नहीं है कि प्रशासन की लापरवाही से पुष्पा का नामांकन स्वीकार किया गया या इसे जानबूझकर नज़रअंदाज़ किया गया लेकिन इस घटना ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा दिए हैं। राजनीतिक हलकों में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या NCP इस विवाद से बचने के लिए जल्दी से कदम उठाएगी या पार्टी इसे अपने चुनावी अभियान का हिस्सा बनाएगी।
