स्थानीय लोगों से पूछताछ करने पर पुलिस को और भी चौंकाने वाली जानकारी मिली। जिन लोगों को दस्तावेज़ों में महिला के माता-पिता बताया गया थाउनका उससे कोई वास्तविक पारिवारिक रिश्ता नहीं था। इस पर पुलिस ने पूरे मामले की गहन जांच शुरू कीजिसमें साजिश की परतें धीरे-धीरे खुलती चली गईं।जांच के दौरान पुलिस ने देंदुआ निवासी छोटन सेन को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि छोटन सेन ने अपने चाचा उत्पल सेन और चाची शुभंकारी सेन को महिला का माता-पिता दिखाकर फर्जी दस्तावेज़ तैयार करवाए थे। जब पुलिस ने उत्पल सेन से पूछताछ कीतो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनकी कोई बेटी नहीं है और न ही मायना सेन नाम की किसी लड़की से उनका कोई संबंध है।
पुलिस पूछताछ में छोटन सेन ने यह भी स्वीकार किया कि मायना सेन उसकी पत्नी नहीं है। उसने बताया कि वर्ष 2019 में उसकी मुलाकात कोली से हुई थीजो बांग्लादेश की नागरिक है और अवैध रूप से भारत में दाखिल हुई थी। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि महिला लंबे समय तक कुल्टी के रेड लाइट एरिया में फर्जी पहचान के साथ रह रही थी।पुलिस का मानना है कि अपनी असली पहचान उजागर होने के डर से महिला बांग्लादेश लौटने की तैयारी में थी और इसी वजह से जल्दबाजी में पासपोर्ट बनवाने की कोशिश की गई। यह पूरा मामला भारतीय नागरिकता हासिल करने के इरादे से रची गई साजिश का हिस्सा बताया जा रहा है।
आरोपी छोटन सेन के खिलाफ अवैध घुसपैठ में मददजालसाज़ीफर्जी दस्तावेज़ तैयार करने और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अहम दस्तावेज़ों के दुरुपयोग की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। उसे आसनसोल जिला अदालत में पेश किया गयाजहां से दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।पश्चिम बर्दवान। जिले के सालानपुर थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहांफर्जीदस्तावेज़ों के जरिए एक बांग्लादेशी महिला को भारतीय नागरिक बनाने की सुनियोजित साजिश का खुलासा हुआ है। यह पूरा मामला उस समय उजागर हुआ, जब एक पासपोर्ट आवेदन के सत्यापन के दौरान दस्तावेज़ों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। पुलिस जांच में सामने आया कि ‘कोली’ नाम की बांग्लादेशी महिला को ‘मायना सेन’ के नाम से भारतीय नागरिक साबित करने की कोशिश की जा रही थी।
पुलिस के मुताबिक, साजिश के तहत सबसे पहले महिला के लिए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कराया गया। इसके बाद उसी आधार पर आधार कार्ड, वोटर कार्ड और पैन कार्ड जैसे अहम सरकारी दस्तावेज बनवाए गए। इन्हीं दस्तावेज़ों के सहारे पासपोर्ट के लिए आवेदन किया गया था। जब पासपोर्ट सत्यापन के लिए पुलिस आवेदन में दर्ज पते पर पहुंची, तो वहां ‘मायना सेन’ मौजूद नहीं मिली।
स्थानीय लोगों से पूछताछ करने पर पुलिस को और भी चौंकाने वाली जानकारी मिली। जिन लोगों को दस्तावेज़ों में महिला के माता-पिता बताया गया था, उनका उससे कोई वास्तविक पारिवारिक रिश्ता नहीं था। इस पर पुलिस ने पूरे मामले की गहन जांच शुरू की, जिसमें साजिश की परतें धीरे-धीरे खुलती चली गईं।जांच के दौरान पुलिस ने देंदुआ निवासी छोटन सेन को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि छोटन सेन ने अपने चाचा उत्पल सेन और चाची शुभंकारी सेन को महिला का माता-पिता दिखाकर फर्जी दस्तावेज़ तैयार करवाए थे। जब पुलिस ने उत्पल सेन से पूछताछ की, तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनकी कोई बेटी नहीं है और न ही ‘मायना सेन’ नाम की किसी लड़की से उनका कोई संबंध है।पुलिस पूछताछ में छोटन सेन ने यह भी स्वीकार किया कि मायना सेन उसकी पत्नी नहीं है। उसने बताया कि वर्ष 2019 में उसकी मुलाकात ‘कोली’ से हुई थी, जो बांग्लादेश की नागरिक है और अवैध रूप से भारत में दाखिल हुई थी। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि महिला लंबे समय तक कुल्टी के रेड लाइट एरिया में फर्जी पहचान के साथ रह रही थी।
पुलिस का मानना है कि अपनी असली पहचान उजागर होने के डर से महिला बांग्लादेश लौटने की तैयारी में थी और इसी वजह से जल्दबाजी में पासपोर्ट बनवाने की कोशिश की गई। यह पूरा मामला भारतीय नागरिकता हासिल करने के इरादे से रची गई साजिश का हिस्सा बताया जा रहा है।आरोपी छोटन सेन के खिलाफ अवैध घुसपैठ में मदद, जालसाज़ी, फर्जी दस्तावेज़ तैयार करने और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अहम दस्तावेज़ों के दुरुपयोग की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। उसे आसनसोल जिला अदालत में पेश किया गया, जहां से दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
