नई दिल्ली।राजस्थान के जालोर जिले से एक बार फिर ऐसा मामला सामने आया है, जिसने परंपरा, तकनीक और महिलाओं की आज़ादी को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जिले की एक ग्राम पंचायत ने अपने क्षेत्र में आने वाले 15 गांवों की महिलाओं और लड़कियों के स्मार्टफोन इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। पंचायत के इस निर्णय के अनुसार अब बहुएं और बेटियां कैमरा फोन या स्मार्टफोन का उपयोग नहीं कर सकेंगी और केवल साधारण कीपैड मोबाइल ही रख पाएंगी।यह फैसला जालोर जिले के गाजीपुर गांव में आयोजित चौधरी समुदाय की एक बड़ी पंचायत बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता समाज के वरिष्ठ सदस्य सुजनाराम चौधरी ने की। पंचायत में मौजूद पंचों और समाज के प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव को पारित किया, जिसे आगामी 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस से लागू किया जाएगा।
सामाजिक कार्यक्रमों में मोबाइल पूरी तरह प्रतिबंधित
पंचायत के फैसले के अनुसार महिलाओं और लड़कियों को न केवल स्मार्टफोन से दूर रहना होगा, बल्कि उन्हें किसी भी सामाजिक आयोजन, शादी-ब्याह, पारिवारिक समारोह या यहां तक कि पड़ोस के घर जाते समय भी मोबाइल फोन साथ ले जाने की अनुमति नहीं होगी। पंचायत का मानना है कि इससे सामाजिक मर्यादाओं का पालन होगा और पारिवारिक माहौल बेहतर बनेगा।
पढ़ाई कर रही छात्राओं के लिए अलग नियम
हालांकि पंचायत ने स्कूली छात्राओं के लिए कुछ शर्तों के साथ छूट भी तय की है। जो लड़कियां पढ़ाई के लिए मोबाइल फोन का उपयोग करती हैं, वे केवल अपने घर में ही फोन चला सकेंगी। स्कूल, ट्यूशन, सामाजिक कार्यक्रम या किसी रिश्तेदार के घर जाते समय मोबाइल फोन ले जाना पूरी तरह वर्जित रहेगा। पंचायत के पंच हिम्मतराम ने गांव में मुनादी कराकर इस निर्णय की जानकारी सार्वजनिक रूप से दी है।
आंखों की सेहत और बच्चों का हवाला
पंचायत के इस फैसले को लेकर जब सवाल उठे, तो पंचायत अध्यक्ष सुजनाराम चौधरी ने इसके पीछे तर्क पेश किया। उन्होंने कहा कि गांव की महिलाएं अक्सर घरेलू काम के दौरान बच्चों को व्यस्त रखने के लिए मोबाइल फोन दे देती हैं, जिससे बच्चों की आंखों की रोशनी पर बुरा असर पड़ रहा है। उनके अनुसार, छोटे बच्चों में मोबाइल की लत बढ़ रही है, जो भविष्य के लिए खतरा बन सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस फैसले का उद्देश्य महिलाओं को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य और सामाजिक व्यवस्था को बेहतर बनाना है। पंचायत का दावा है कि मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल से पारिवारिक संवाद कम हो रहा है और सामाजिक मूल्यों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस फैसले का उद्देश्य महिलाओं को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य और सामाजिक व्यवस्था को बेहतर बनाना है। पंचायत का दावा है कि मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल से पारिवारिक संवाद कम हो रहा है और सामाजिक मूल्यों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
15 गांवों में होगा लागू
यह निर्णय केवल गाजीपुर गांव तक सीमित नहीं है। पंचायत के अंतर्गत आने वाली 14 पट्टियों के 15 गांवों में इसे सख्ती से लागू करने की तैयारी की जा रही है। पंचायत ने साफ किया है कि सभी परिवारों को इस नियम का पालन करना अनिवार्य होगा और सामुदायिक स्तर पर इसकी निगरानी भी की जाएगी।
उठने लगे सवाल
हालांकि पंचायत के इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया और सामाजिक संगठनों में सवाल भी उठने लगे हैं। कई लोग इसे महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे परंपरा और सामाजिक अनुशासन का मामला बता रहे हैं। फिलहाल पंचायत अपने फैसले पर अडिग नजर आ रही है और 26 जनवरी से इसे लागू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
