नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शनिवार को कहा कि उसके आदित्य-एल1 सौर मिशन ने नयी जानकारी प्रदान की है कि कैसे एक शक्तिशाली सौर तूफान पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है।
धरती पर सौर तूफान का असर
इस अध्ययन में भारत की पहली सौर वेधशाला आदित्य-एल1 से प्राप्त डेटा के साथ-साथ अन्य अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष अभियानों के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया, ताकि सूर्य से निकले सौर प्लाज़्मा के एक विशाल विस्फोट के पृथ्वी पर पड़े प्रभाव को समझा जा सके। बयान में कहा गया, ‘अंतरिक्ष मौसम (स्पेस वेदर) से तात्पर्य अंतरिक्ष में उत्पन्न उन परिस्थितियों से है, जो सूर्य पर होने वाली अस्थायी गतिविधियों जैसे सौर प्लाज़्मा विस्फोट के कारण बनती हैं। ये घटनाएं पृथ्वी पर उपग्रहों, संचार एवं दिशा सूचक सेवाओं तथा विद्युत ग्रिड अवसंरचना को प्रभावित कर सकती हैं।’
सौर तूफान से गर्म हो जाता है वायुमंडल
इसरो के अनुसार सौर तूफान के अशांत क्षेत्र ने पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को अत्यधिक रूप से संकुचित कर दिया, जिससे वह असामान्य रूप से पृथ्वी के बहुत करीब आ गया और कुछ समय के लिए भू-स्थिर कक्षा (जियोस्टेशनरी ऑर्बिट) में स्थित कुछ उपग्रह उनके संपर्क में आ गए।
इसरो ने कहा कि ये निष्कर्ष सौर गतिविधियों की लगातार निगरानी की आवश्यकता को और मजबूत करते हैं। एजेंसी के अनुसार, यह अध्ययन अंतरिक्ष मौसम से जुड़ी घटनाओं को समझने और उनके वास्तविक समय में आकलन की अहमियत को रेखांकित करता है, ताकि महत्वपूर्ण अंतरिक्ष परिसंपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
