असम की रक्षा करना हमारा राष्ट्रीय दायित्व
मुख्यमंत्री शर्मा ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि संदिग्ध लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराना केवल भाजपा की नहीं, बल्कि हर असमिया नागरिक और राजनीतिक दल की जिम्मेदारी है। विपक्ष पर निशाना: उन्होंने अन्य दलों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि राज्य में कोई बांग्लादेशी नहीं है। भाजपा का रुख सीएम ने गर्व से कहा, कम से कम भाजपा ने यह दिखाने की कोशिश की है कि असमिया लोगों ने अभी तक आत्मसमर्पण नहीं किया है। यदि हम शिकायतें दर्ज नहीं कराते, तो कल लोग हमसे ही सवाल पूछते।
अपर असम में बढ़ती संदिग्धोंकी मौजूदगी
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि अज्ञात लोगअब अपर असम के उन जिलों में भी घुसपैठ कर चुके हैं जहाँ पहले उनकी मौजूदगी शून्य थी। तिनसुकिया और दुलियाजान: सीएम ने बताया कि तिनसुकिया में अज्ञात लोग जमीनों की खरीदारी कर रहे हैं, जबकि वहां के हिंदू अपनी जमीन बेच रहे हैं। मार्गेरिटा और दुलियाजान के लोगों ने भी घुसपैठ की शिकायतें की हैं। सुरक्षा का संकट: उन्होंने गोलाघाट के सरूपथर में चलाए गए बेदखली अभियान का हवाला देते हुए कहा कि जो सुरक्षा पांच साल पहले थी, वह अब धीरे-धीरे नदारद होती जा रही है।
क्या है मियांशब्द का विवाद
असम की राजनीति में मियांशब्द मूल रूप से बांग्ला भाषी मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। संदर्भ स्थानीय लोग अक्सर इस शब्द को बांग्लादेशी प्रवासियों के लिए एक पहचान के रूप में देखते हैं। हालांकि, हाल के वर्षों में समुदाय के कुछ कार्यकर्ताओं ने इसे विरोध और अपनी विशिष्ट पहचान के प्रतीक के रूप में अपनाना शुरू कर दिया है।
मतदाता संख्या में बढ़ोतरी
गौरतलब है कि पिछले साल 30 दिसंबर को प्रकाशित एकीकृत मसौदा मतदाता सूची के अनुसार, असम में मतदाताओं की संख्या में 1.35 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि यदि भाजपा कार्यकर्ता ये 5 लाख शिकायतें दर्ज नहीं कराते, तो निर्वाचन आयोग और सरकार के लिए इन संदिग्ध नामों की जांच करना संभव नहीं होता।
