यूपी राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस फैसले पर विरोध जताया है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने एबीपी न्यूज़ से बातचीत में कहा कि बिजली कंपनियों द्वारा लगाया गया दस फीसद फ्यूल सरचार्ज असंवैधानिक है और इसके खिलाफ उन्होंने विद्युत नियामक आयोग में प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। उनका कहना है कि नियामक आयोग ने नवंबर में टैरिफ में अधिकतम बिजली की खरीद लागत 4.94 रुपये प्रति यूनिट तय की थी, लेकिन अब पावर कॉर्पोरेशन ने इसे 5.79 रुपये प्रति यूनिट कर दिया, जो स्पष्ट नहीं है।
अवधेश कुमार ने महंगी बिजली की खरीद पर सवाल उठाते हुए कहा कि अप्रैल-मई गर्मियों में बिजली की खपत अधिक होने के बावजूद प्रति यूनिट लागत 4.76 रुपये थी, लेकिन नवंबर में अचानक महंगी बिजली क्यों खरीदी गई, इसे लेकर पारदर्शिता की आवश्यकता है। उन्होंने नियामक आयोग से इस पूरे फैसले की जांच कराने और इस सरचार्ज को लागू करने से रोक लगाने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि पॉवर कॉर्पोरेशन असंवैधानिक तरीके से प्रदेश की जनता पर अतिरिक्त भार डालना चाहता है। जबकि यूपी देश का पहला राज्य है जहां जनता का बिजली कंपनियों पर 50 हजार करोड़ रुपये का सरप्लस है, ऐसे में फ़्यूल सरचार्ज लागू करना उचित नहीं है।
इस फैसले से राज्य के लाखों उपभोक्ताओं की जेब पर असर पड़ेगा और राज्य में बिजली की बढ़ती कीमतों को लेकर नई बहस छिड़ गई है। विद्युत उपभोक्ता परिषद ने जनता से अपील की है कि वे इस फैसले पर नजर रखें और न्यायिक मार्गों के माध्यम से उचित कार्रवाई की मांग करें।
