यूजीसी बिल को लेकर सरकार को घेरा
सिराथू विधायक ने कहा कि जिस बदलाव, सुधार और रिफॉर्म की हम बात कर रहे हैं उसका उद्देश्य है न्याय, समानता और दक्षता है लेकिन, बीजेपी की सरकार ने इस विचार के उद्देश्य की धज्जियां उड़ा दी है.
उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं है तो क्या कारण था कि देश के उच्च संस्थानों में समानता के भाव को उजागर करने के लिए जिस यूजीसी एक्ट 2026 को संसदीय समिति की संस्तुति के बाद और कोर्ट के निर्देशानुसार लाया गया क्यों आपने उसे लाकर पिछड़ा वंचित समाज को खुश होने का अवसर दिया और फिर सोची समझी रणनीति के तहत सड़कों पर तनाव पैदा करने का काम किया. इसके बाद इसे न्यायपालिका के पेचीदा घुमाव में फंसा दिया.
भारतीय जनता पार्टी पर उठाए सवाल
पल्लवी पटेल ने सवाल किया आपको ये करके क्या मिला? यूजीसी समानता अधिनियम के लागू होने के बाद यहां सालों से चले आ रहे वंचित और अगड़ा समाज की खाई को पाटा जा सकता था लेकिन आपने इस खाई को और गहरा कर दिया. ये तो वहीं बात हुई चित भी अपनी और पट भी अपनी.
जितना सवाल आज इस सरकार पर उठ रहा है उतना है सवाल आज हम जन प्रतिनिधियों पर भी उठ रहा है. क्योंकि वंचित समाज आज उच्च शिक्षा और सम्मान के लिए अपने जनप्रतिनिधियों की ओर आशा भरी निगाहों से देख रहा है. ये हम सबकी जिम्मेदारी है कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस पर चर्चा की जाए..
‘घुटनों पर आकर लागू करेगी सरकार’
उन्होंने रामधारी सिंह दिनकर की कविता पढ़ते हुए कहा कि ‘जो तटस्थ है समय लिख देगा उसका भी अपराध..’ पल्लवी ने कहा कि मैं भविष्य वक्ता तो नहीं लेकिन याद रखिए जिस बीजेपी सरकार ने इस यूजीसी बिल को कोर्ट में फंसाकर का काम किया वहीं घुटनों पर आकर इस बिल को लागू करेगी. बीजेपी का हर कदम रिफॉर्म नहीं होता है.
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