फिलहाल परमाणु पनडुब्बियों की संख्या के मामले में अमेरिका दुनिया में सबसे आगे है। उसके पास 60 से 70 के बीच परमाणु पनडुब्बियां हैं जिनमें बैलिस्टिक मिसाइल और अटैक पनडुब्बियां शामिल हैं। इसके बाद रूस और चीन का स्थान आता है। अभी चौथे नंबर पर ब्रिटेन और पांचवें पर फ्रांस है जबकि भारत इस सूची में तेजी से ऊपर चढ़ रहा है। इस समय भारतीय नौसेना के पास दो सक्रिय परमाणु पनडुब्बियां हैं। एक तीसरी परमाणु पनडुब्बी के इस साल के अंत तक और चौथी के अगले साल सेवा में शामिल होने की उम्मीद है। यह संख्या भले ही अभी कम लगती हो लेकिन यह भारत के अब तक के सबसे बड़े और महत्वाकांक्षी पनडुब्बी निर्माण कार्यक्रम की शुरुआती अवस्था है।
भारत की यह बढ़त पूरी तरह स्वदेशी कार्यक्रमों पर आधारित है। इसमें INS अरिहंत से शुरू हुई अरिहंत क्लास पनडुब्बियां भविष्य की S5 क्लास बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां और प्रोजेक्ट-77 के तहत विकसित की जा रही परमाणु अटैक पनडुब्बियां शामिल हैं। भारतीय नौसेना दो S5 क्लास पनडुब्बियों का निर्माण शुरू कर चुकी है और भविष्य में चार और S5 क्लास पनडुब्बियां बनाने की योजना है। यानी कुल छह S5 क्लास पनडुब्बियां भारत की समुद्री परमाणु ताकत की रीढ़ बनेंगी। इसके साथ ही प्रोजेक्ट-77 के तहत परमाणु अटैक पनडुब्बियों का निर्माण किया जा रहा है। शुरुआत में दो पनडुब्बियां बनाई जाएंगी लेकिन आगे चलकर इनकी संख्या छह तक पहुंच सकती है। ये पनडुब्बियां विमानवाहक पोतों की सुरक्षा दुश्मन पनडुब्बियों की निगरानी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी को मजबूत करेंगी।
अनुमान है कि 2035 तक भारत के पास कुल आठ परमाणु पनडुब्बियां होंगी जिनमें चार अरिहंत क्लास दो S5 क्लास और दो प्रोजेक्ट-77 की पनडुब्बियां शामिल होंगी। इस स्तर पर भारत फ्रांस को पीछे छोड़ देगा जिसकी परमाणु पनडुब्बियों की संख्या फिलहाल नौ के आसपास है और आगे इसमें ज्यादा बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। 2040 तक भारत कम से कम 10 परमाणु पनडुब्बियों का बेड़ा खड़ा कर लेगा जबकि ब्रिटेन की संख्या लगभग नौ पर स्थिर रहने की उम्मीद है। इस तरह भारत 15 साल बाद फ्रांस और ब्रिटेनदोनों देशों को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की चौथी सबसे बड़ी परमाणु पनडुब्बी शक्ति बन जाएगा। INS अरिहंत से शुरू हुई यह यात्रा भारत को वैश्विक समुद्री शक्ति संतुलन में निर्णायक स्थान दिलाने की ओर बढ़ा रही है।
