रिपोर्ट में कहा गया है कि पुराने हवाई अड्डे जो व्यस्त शहरों के केंद्रों में स्थित हैं, पहले से ही अपनी पूरी क्षमता पर ऑपरेट कर रहे हैं और बढ़ते एयर ट्रैवल को संभालने में असमर्थ हैं। ऐसे में अल्टरनेट एयरपोर्ट्स पुराने एयरपोर्ट्स पर दबाव कम करने और भविष्य में बढ़ती यात्री संख्या को संभालने में अहम भूमिका निभाएंगे।
विश्लेषण में यह भी बताया गया कि अगले चार वित्तीय वर्षों में इन नए एयरपोर्ट्स के विस्तार से कुल क्षमता बढ़कर वित्त वर्ष 2030 तक प्रति वर्ष 4.5 से 5 करोड़ यात्रियों तक पहुँच सकती है। इस वृद्धि को मौजूदा एयरपोर्ट्स पर बढ़ती भीड़, कनेक्टिविटी में सुधार और नए कैचमेंट क्षेत्रों के कारण बल मिलेगा।
हालांकि रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए परिचालन में समय पर वृद्धि करना अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। CRISIL ने अपनी रिपोर्ट में दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एनसीआर मुंबई महानगर क्षेत्र एमएमआर और गोवा सहित पुराने हवाई अड्डों के आसपास स्थित चालू और आगामी अल्टरनेट एयरपोर्ट्स पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है।
एनसीआर और एमएमआर जैसे महानगरों में पुराने हवाई अड्डे पहले से ही अपनी डिजाइन क्षमता के लगभग 87 प्रतिशत पर ऑपरेट कर रहे हैं। स्थान की कमी के कारण इन एयरपोर्ट्स में बड़े विस्तार परियोजनाओं की गुंजाइश सीमित है। इसी कारण अल्टरनेट एयरपोर्ट्स को विकसित करना अपरिहार्य हो गया है।
CRISIL रेटिंग्स के निदेशक अंकित हखू ने कहा कि महानगरों में स्थित नए एयरपोर्ट्स से वित्त वर्ष 2030 तक कुल क्षेत्रीय यातायात का 20-25 प्रतिशत हिस्सा संभालने की उम्मीद है। उन्होंने आगे बताया कि नए एयरपोर्ट्स के शुरुआती वर्षों में विमानन और गैर-विमानन दोनों प्रकार के राजस्व में वृद्धि करना महत्वपूर्ण होगा।
रिपोर्ट में मुंबई के पुराने एयरपोर्ट के विकास पर ध्यान दिया गया। वित्त वर्ष 2017 के बाद इसकी विकास दर धीमी रही क्योंकि क्षमता संबंधी बाधाओं के कारण एयरलाइंस व्यस्त समय में अतिरिक्त उड़ानें उपलब्ध नहीं करा पाईं। इसके विपरीत, दिल्ली एयरपोर्ट का विकास लगातार जारी रहा। लेकिन क्षेत्र में दूसरे हवाई अड्डे के विकास के बिना दिल्ली भी मध्यम अवधि में इसी तरह की चुनौतियों का सामना कर सकती है।
कुछ अन्य महानगरों जैसे बेंगलुरु और हैदराबाद के हवाई अड्डों में अभी भी विस्तार की गुंजाइश बनी हुई है। ये एयरपोर्ट्स पिछले वित्तीय वर्ष में अपनी डिजाइन क्षमता के लगभग 65 प्रतिशत पर ऑपरेट कर रहे थे जिससे भविष्य में यात्रियों की बढ़ती संख्या को संभालने के लिए विस्तार की संभावना बनी हुई है।
