उन्होंने कहा, “कांग्रेस का एक इतिहास और विरासत रही है। अब वह ढलान पर है लेकिन विजय कांग्रेस को समर्थन देने के लिए तैयार हैं। यह मौका कांग्रेस को गंवाना नहीं चाहिए।” हालांकि, अभी तक न तो विजय और न ही उनकी पार्टी TVK ने इस प्रस्ताव की आधिकारिक पुष्टि या खंडन किया है।
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विजय के पिता के इस बयान पर कांग्रेस की ओर से भी तुरंत प्रतिक्रिया आई।
DMK से बढ़ती दूरी?
कांग्रेस का यह बयान सख़्त जरूर है, लेकिन सियासी अटकलें थमी नहीं हैं। कांग्रेस फिलहाल सत्तारूढ़ DMK की सहयोगी है और 2019, 2021 और 2024 के चुनावों में दोनों ने साथ मिलकर जीत हासिल की थी। लेकिन अब कांग्रेस DMK से सत्ता में हिस्सेदारी चाहती है। सूत्रों के हवाले से NDTV की रिपोर्ट में कहा गया है कि कांग्रेस कम से कम छह मंत्री पद मांग रही है, जिस पर DMK अभी तक सहमत नहीं हुई है।
सीट बंटवारे पर भी फंसा पेच
इसके अलावा आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सीट बंटवारे पर भी दोनों दलों में सहमति नहीं बन पाई है। कांग्रेस चाहती है कि उसे कम से कम 35 सीटें मिलें लेकिन DMK 19 से ज़्यादा सीटें देने को तैयार नहीं है। यही वजह है कि कांग्रेस के भीतर असंतोष बढ़ता जा रहा है। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने राज्य में DMK गठबंधन के साथ 9 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि 2021 के विधानसभा चुनावों में 25 में से 18 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
TVK का ऑफर क्यों लुभावना?
सूत्रों के अनुसार, TVK ने कांग्रेस को 60 से अधिक सीटें और सरकार बनने की स्थिति में मंत्री पदों का भी संकेत दिया है। यही कारण है कि भले ही सार्वजनिक तौर पर कांग्रेस इनकार कर रही हो, लेकिन अंदरखाने इस प्रस्ताव पर मंथन जारी है। विश्लेषकों का कहना है कि तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरण बनते-बिगड़ते देर नहीं लगती। ऐसे में कांग्रेस और विजय की पार्टी के बीच संभावित गठबंधन को पूरी तरह नकारा भी नहीं जा सकता। आने वाले दिनों में यह साफ़ होगा कि कांग्रेस DMK के साथ बनी रहती है या किसी नए सियासी रास्ते की ओर बढ़ती है।
